
बकलोह – भूषण गुरुंग
आज बकलोह के प्राचीन काली माता मंदिर में चैत्र माह के नवरात्रे के पहले दिन सुबह से ही लोगो की भीड़ लगनी शुरू हो गया । ये मंदिर सब से प्राचीन मंदिरों मे से एक माना जाता है। ये मंदिर का स्थापना अप्रैल माह मे सन 1886 में 2/4 G,R के सूबेदार मेजर कुलपति गुरूंग द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई था।
माता के द्वारा कुलपति गुरूंग को सपने में पिंडी को स्थापना करने को कहा था तब से ये माता की पिंडी उसी जगह में बिराज मान है।तब से ये मंदिर जिला चम्बा के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। ये मंदिर चिलामा गॉव के सील हिल के पहाड़ीयो के बीचों बीच मे बसा हुआ है ।
इसलिए हर साल चतुर्थ गोरखा राइफल के पांचों यूनिट के जवान औऱ ऑफिसर लोग इस मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए जरूर आते है। इन को अपना कुल देवी के रूप मे मानते है। इस मंदिर का देख रेख बकलोह के गोरखा सभा के द्वारा किया जाता है।
मन्दिर परिसर ने पूजा अर्चना करने वाले पंडित राजकुमार शर्मा का कहना है यहाँ हर साल माता के मन्दिर मेअप्रैल माह मे जागरण किया जाता है। और साल में इस मंदिर में 3 से 4 बार बड़े बड़े भंडारे का आयोजन किया जाता है।
यहाँ अष्टमी के दिन गोरखा सभा के सभी सदस्यों द्वारा हवन पूजन किया जाता है। काली माता मंदिर कमेटी की और से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।
