
बकलोह – भूषण गुरुंग
हिन्दू धर्म में पूर्ण आस्था रखने वाले सभी गोर्खाली समाज के लोगो का होली पर्व आज से शरू हो गया है। ये चार दिनो तक चलने वाला ये पर्व शुक्रबार को बड़े होली के बाद संपन्न होगा। सुबह से ही घर का सबसे बड़ा मुख्या नहा धोकर सभी देवी देवताओ औऱ अपने कुल की देवी को लाल पीला औऱ हरा रंग का गुलाल औऱ घर मे जो भी मिष्ठान बनाया होता है उनको भोग लगाने के बाद एक छोटे से कन्या के माथे में ये गुलाल लगा कर उसके बाद सभी परिबार को बिठा कर एक साथ ये गुलाल सभी के माथे में लगाया जाता है।
उसके बाद घर में जो भी पकवान बनाया जाता है गुजिया, रसगुल्ले, सैलरोटी, मट्टी, नमकीन जलेबी,और गर्मा गर्म पकोड़े आदि जो भी पकवान बना होता है। उनको परोसा जाता है। ये पर्व इस लिया पांच दिन तक मनाया जाता है। कि जो भी सगे संबंधी है वो दूर दूर से देश की किसी भी कोने मे हो इस पर्व को मनाने ज़रूर आते है। अंतिम दिन मे होलिका दहन के अगले दिन सभी के घर घर जाकर नाच गाना कर के होली खेलने के बाद शाम को बचे हुए गुलाल को जल में प्रवाह कर दया जाता है।
