बदलते रंग

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लेखक- राजीव डोगरा, भाषा अध्यापक, गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा, पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश, 9876777233, rajivdogra1@gmail.com

बदलते हुए रंगों के साथ, बदलते हुए अपने लोग देखे हैं।

चेहरे पर नकाब ओढ़े, सीने पर वार करते अपने ही लोग देखे हैं।

हरे रंगों जैसी, अब लोगों के दिलों में हरियाली कहाँ ? अपने ही लोग खंजर फेर, ह्रदय तल को बंजर करते देखे हैं।

रंगों की बौछार, फैली है हर जगह, फिर भी, गिरगिट की तरह, रंग बदलते अपने रिश्तेदार देखे हैं।

करते होंगे मोहब्बत वो, शायद किसी और से, हमने अपने लिए तो, उनके चेहरे पर, नफ़रत के बदलते
नए-नए रंग देखे हैं।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

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