
राजा का तालाब- अनिल कुमार
मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे यूक्रेन – रूस युद्ध के साए से सकुशल घर पहुंचने वाली उपमंडल फतेहपुर की ग्राम पंचायत रैहन की कृणिका गौतम पुत्री जतिंद्र गौतम ने बताया कि उसके सामने दस मीटर की दूरी पर जब एक धमाका हुआ जो शैल था। पहले लगा कि ग्रेनेड फटा है। ऐसे में वो अपने सहयोगियों संग जमीन पर लेट गए।और डर के मारे रोने लग पड़े।
उसने बताया कि एक बम उसकी आंखो के सामने बिल्डिंग पर भी पड़ा। तब भी वो बेहद डर गई थी। खारकीव मेडिकल यूनिवर्सिटी में मात्र तीन महीने पहले एमबीबीएस में दाखिला लेने वाली कृणिका गौतम ने बताया कि वो आठ दिन बंकर में रही।
नौवें दिन जब वो हॉस्टल से आठ किलोमीटर दूर बुग्जार रेलवे स्टेशन पहुंची। तो यूक्रेन छोड़कर भागने वाले स्थानीय लोगों की आपसी लड़ाई में उनकी ट्रेन निकल गई। तब 2 मार्च को वो 15 किलोमीटर दूर पैदल ही ग्रीन जोन फिसोफिन पहुंचे। चार घंटे के सीजफायर के उपरांत खारकिव पर रूस द्वारा बड़े हमले की चेतावनी पर तीन बजे एजेंसी द्वारा बस के माध्यम से पौलेंड के लिए रवाना हुए।
चार मार्च तीन बजे सुबह ट्रोनोफिल में पहुंचे।इस बीच एजेंसी ने रोमानिया की राह पकड़ी। यहां से 6 मार्च रात साढ़े ग्यारह बजे एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी। कृणिका के अनुसार बंकर में आठ दिन रहने के दौरान चार दिन तो खाना नियमित मिला। परन्तु खाने की कमी के चलते ड्राई फ्रूट के सहारे दिन गुजारने पर उन्हें मजबूर होना पड़ा।
कृणिका ने बताया कि डर की स्थिति में जो दिन गुजारे। वो पीड़ा असहनीय थी। वो कभी नहीं भूलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा वोल्वो बस के माध्यम से गुरुवार सुबह साढ़े पांच बजे अपने घर सकुशल पहुंचने पर कृणिका का उसकी माता नीतू गौतम, पिता जतिंद्र गौतम ब स्थानीय लोगों ने उसका फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया।
