वोमेंस डे स्पेशल: मुझे नीलगगन तक पहुंचने के लिए थैंक यू-काव्य वर्षा! 

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भलाड- शिबू ठाकुर

हर साल टीवी पर देखा करती थी| अखबारों में भी बड़े बड़े अक्षरों में लिखा होता था “विमेंस डे स्पेशल” कुछ न कुछ,पर मैंने न कभी ध्यान से देखा न पढ़ा| इसके दो कारन हो सकते हैं, एक तो मुझे लगता था ये दिन उन कुछ खास औरतों का होता होगा जो बहुत ही पढ़ी लिखी अमीर होती होंगीं या उनका जिन्होंने देश का नाम रोशन किया है अपने बड़े बड़े कार्यों से| और हुम्हारा तो उस दुनियां से कोई लेना देना है नहीं तो फिर पढ़ कर क्या फ़ायदा| औऱ ना पढ़ने का दूसरा कारन साफ तौरपर जलनखोरी ही हो सकता है|

मुझे अक्सर पढ़े लिखें समझदार व्यक्ति से जलन हो ही जाती है| पर ऐसा हर बार नहीं होता क्यूंकि पढ़े लिखें तो बहुत मिले पर समझदार कम ही लोग मिले मुझे ज़िन्दगी में| जिन्होंने मुझे इस खुशफहमी में रखा की अगर ऐसे होते हैं पढ़े लिखें तो मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ | कुछ ऐसी भी शख्सियतें हैं जो बहुत पढ़े लिखें, कामयाब ! और समझदार हैं, पर मैं उन्हें पढ़ती नहीं| क्यूंकि मैं उनसे जलती थी! ये जलन दुश्मनी वाली नहीं थी, ये कुछ और था.. शायद नाकामयाबी वाली जलन या.. वहां पहुँचने की चाह.. ! पता नहीं क्या था..

जो भी रहा हो, मुझे इस दिन का महत्व नहीं जानने दिया | शायद कुदरत ने करीब से दिखाना था, कुदरत के उन हाथों का आभार करना बहुत ज़रूरी है जिन्होंने मुझे भी दूसरी दुनियां की औरतों वाला सम्मान दिया जिन्होंने अपने कार्यों से देश प्रदेश का नाम रौशन किया होता है| और अपने हाथों से मेरी व्हीलचेयर उठा कर सीधा उस मंच पर पहुंचा दिया|

जहां पहुँचने का सपना लिखने से पहले देख रही थी, पर मन को ये कह कर डरा भी लेती थी की तमाशा ही बनेगा| क्यूंकि वो मंच बहुत ऊंचा होता है और मेरी हैसियत कहाँ उन सीढ़ियों पर चढ़ कर कविता ख़त्म करने के बाद “थैंक यू” बोलने की, औऱ कोई दया दिखा कर निचे आए यह मुझे गवारा नहीं|

पर ये बातें सिर्फ मेरे दिल और दिमाग़ के ही बिच होतीं थीं! ना जाने कौनसी हवा चुगलखोर निकली और कह आई कुछ अंजान चेहरों से जिन्हें मैं बिलकुल नहीं जानती थी और उन्होंने भी मुझे नहीं देखा था| फिर भी पहुंचा दिया मुझे मेरे सपनों के पहले पड़ाव पर जहां मैंने एक सपना पूरा किया “थैंक यू” कह कर!  थैंक यू- वीरेंद्र शर्मा वीर सर, थैंक यू- विजय कुमार पूरी सर, थैंक यू- विनोद भावुक सर (फोकस हिमाचल), थैंक यू- हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी(शिमला), थैंक यू- दिलीप वशिष्ठ सर, थैंक यू विशाल ठाकुर भईया. !

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