गलती से ‘मरणोपरांत’ शब्द उच्चारण हुआ जिसके लिए खेद- महेन्द्र सिंह ठाकुर

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बिलासपुर में गणतंत्र दिवस पर वरिष्ठ मंत्री की फिसली जुबान, बिलासपुर के जीवित परमवीर चक्र विजेता को बोल गए मरणोपरांत

बिलासपुर- सुभाष चंदेल

जल शक्ति, राजस्व, बागवानी और सैनिक कल्याण मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर द्वारा जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में संबोधन के दौरान परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार के नाम के साथ जुबान फिसलने के कारण गलती से ‘मरणोपरांत’ शब्द उच्चारण हुआ है जिसके लिए उन्होंने खेद प्रकट किया है।

सम्बोधन में विक्टोरिया क्रास विजेता कैप्टन वीर भंडारी राम और शहीद नायक किरपा राम जिन्हें बहादुरी पुरस्कार “जार्ज क्रास” प्राप्त हुआ है का नाम लिया जाना था इसलिए बिना किसी गलत मंशा से सम्बोधन में परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार के साथ मरणोपरांत का उच्चारण हो गया।

महेन्द्र सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में उनकी किसी को आहत करने की कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे खुद भी एक सैनिक रहे हैं और सैनिक का पूर्ण सम्मान करते है और इसके गौरव का महत्व भी समझते है। उन्होंने कहा कि यदि फिर भी किसी की भावना आहत हुई हो तो इसके लिए क्षमाप्रार्थी है।

यह था मामला

बिलासपुर में आयोजित जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में उस समय सन्नाटा छा गया जब प्रदेश सरकार के वरिष्ठता में मुख्यमंत्री के बाद दूसरे नंबर पर वरिष्‍ठ मंत्री महेंद्र सिंह की जुबान फ‍िसल गई। अपने संबोधन में वह हिमाचल के बिलासपुर से संबंधित जीवित परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार का नाम लेने के बाद उन्हें मरणोपरांत बता गए।

गौर रहे कि संजय कुमार अभी भी सेना में कार्यरत हैं और देश सेवा में जुटे हैं। महेंद्र सिंह ठाकुर बिलासपुर में गणतंत्र दिवस पर आयोजित जिला स्‍तरीय कार्यक्रम में बतौर मुख्‍य अतिथि पहुंचे थे। मंत्री ने अपने संबोधन में देश के वीरों की गाथा सुनाते हुए बिलासपुर के वीर जवान संजय कुमार के बारे में कह दिया कि उन्हें मरणोपरांत परमजीत चक्र से नवाजा गया। हैरानी की बात यह भी है कि इस दौरान किसी अन्‍य नेता व अधिकारी ने भी मंत्री को बीच में नहीं टोका।

हिमाचल सरकार के उक्‍त मंत्री पहले भी विवादों में रहे हैं। कुछ समय पहले उन्‍होंने शिक्षकों को लेकर भी बयान दिया था, जिसमें कोरोना काल में उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और बाद में माफी मांग ली थी। उल्लेखनीय है कि मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर खुद एक सैनिक रह चुके हैं फिर भी उन्हें याद नहीं रहा कि संजय अभी जीवित हैं। एक तरह से उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर वीर सैनिक का अपमान कर दिया। इस बात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग इस बात को गलत बता रहे हैं।

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