मुख्यमंत्री और मंत्रियों को सद्बुद्धि देने के लिए हवन पाठ करवा रहा हिमाचल प्रदेश करुणामूलक संघ

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व्यूरो रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश करूणामुलक संघ के प्रदेशा अध्यक्ष अजय कुमार, मुख्य सलाहकार शशि पाल, मीडिया प्रभारी गगन कुमार का कहना है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को सद्बुद्धि देने के लिए करुणामूलक संघ हवन पाठ करवा रहा है, ताकि भगवान सरकार को सद्बुद्धि दे और इन करुणामूलक आश्रित परिवारों के बारे में सरकार कोई सकारात्मक निर्णय लें और आने वाली आगामी कैबिनेट में राहत प्रदान करें। क्योंकि यह परिवार लगभग 131 दिनों से शांतिप्रिय आंदोलन कर रहे हैं और क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

अगर वर्तमान सरकार आगामी कैबिनेट में इन परिवारों के हित में फैसला नहीं लेती तो उग्र आंदोलन होगा। जिसमें सारी जवाबदेही वर्तमान सरकार की होगी। इन पीड़ित परिवारों का कहना है की अगर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी अपना किसान बिल वापस ले सकते हैं तो हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन करुणामूलक परिवारों के हित मैं फैसला क्यों नहीं ले रहे।

हमने अपने परिवार का सदस्य खोया है। जय राम मंत्रिमंडल सोया है। यह कहावत वर्तमान सरकार पर ठीक बैठती है क्योंकि वर्तमान सरकार के अड़ियल रबेये के कारण आज करुणामूलक परिवार 131 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं, परंतु सरकार इनकी तरफ नहीं देख रही। एक तो इन परिवारों ने अपने घर का सदस्य खोया है। ऊपर से इन परिवारों पर सरकार कोई फैसला नहीं ले पा रही।

इन परिवारों का कहना है कि हमारा कसूर क्या अगर देश के अन्य राज्य करुणा और मृत्यु की वरिष्ठता के आधार पर 3 या 6 महीने के अंदर नौकरी दे सकते हैं, तो प्रदेश सरकार क्यों नहीं। करुणामूलक परिवारों का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों और पॉलिसी के कारण यह परिवार 15 से 20 सालों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, परंतु सरकार अभी भी इनकी सुध नहीं ले रही और अपने चहेतों को नौकरियां दे रही है। सरकार की अपनी मनमानी के कारण अब यह परिवार सड़कों पर उतर आए हैं और उनका कहना है कि या वर्तमान सरकार हमें नौकरी दे अन्यथा हम इसी तरह भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। चाहे हमें मरना भी पड़े हम नहीं उठेंगे !

करुणामूलक संघ के अध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि लगभग 131 दिनों से यह करुणामूलक परिवार कालीबाड़ी मंदिर के पास एक वर्षा शालिका में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। परंतु सरकार इनके प्रति उदासीन है। सरकार इन के हक में कोई फैसला नहीं ले पा रही है। उनका कहना है कि ऐसा कोई जनमंच नहीं है, जहां पर इन्होंने आवाज ना उठाई हो। वर्तमान सरकार के मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष भी इन करुणामूलक परिवारों की पीड़ा को उजागर किया परंतु आश्वासनों के सिवा इन परिवारों को कुछ नहीं मिला !

ऐसा कोई विधानसभा क्षेत्र नहीं है जहां पर यह मुख्यमंत्री व मंत्रियों से ना मिले हो ! परंतु सरकार के झूठे आश्वासनों के कारण यह परिवार दर- दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो गए हैं परंतु सरकार के कानों मैं जू तक नहीं रेंग रही ! यह करुणामूलक परिवार पिछले 131 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे है।

संघ के अध्यक्ष का कहना है अगर सरकार अभी भी इन करुणामूलक परिवारों के हित में कोई फैसला नहीं लेगी तो अब यह परिवार चुप नहीं बैठेंगे और आने वाले टाइम पर उग्र आंदोलन करेंगे अध्यक्ष का कहना है कि शरद ऋतु भी शुरू हो गई परंतु सरकार ने इन करुणामूलक आश्रितों के बारे में विचार नहीं किया ! संघ ने करूणामुलक नौकरी बहाली की गुहार लगाई और आगामी कैबिनेट में भी इस मुददे को उठाने को कहा |

प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि सरकारी नौकरी देने के मामलों पर अभी सरकार कोई अंतिम फैसला नही ले पाई है। जबकि सरकार के पास विभिन्न विभागों में 4500 से ज्यादा मामले है। प्रभावित परिवार करीब 15 साल से नौकरी का इंतजार कर रहें है। उन्होने बताया कि कई विभागों में कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद आश्रित परिवार दर दर की ठोंकरें खाने को मजबुर है।

हिमाचल इस तरह के सेंकडों मामले है, 15 साल बीत जाने के बाद भी आश्रितों को नोकरी नही मिल पाई है। हर रोज कार्यालयों के चक्कर लगा रहे लेकिन अशवाशनों के सिवा आज दिन तक कुछ हाथ नही लगा है। करूणामुलक आश्रितों का कहना है कि उनके परिवार में कोई भी सरकारी नौकरी नही करता है। इन के परिवारों की आर्थिक स्थिती अच्छी नही है। सभी करूणामुलक आश्रितों ने प्रशासन व प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि आगामी कैबिनेट में करूणामुलक नौकरीयों पर सरकार उचित फैसला लें ।

मुख्य मांगे :-

1) समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नोकरियों के केसों को जो 7/03/2019 की पॉलिसी मे आ रहे हैं उनको One Time Settlement के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियाँ दी जाएं |

2) करुणामूलक आधार पर नोकरियों वाली पॉलिसी में संसोधन किया जाए व उसमे Rs 62500 एक सदस्य सालाना आय सीमा शर्त को पूर्ण रूप से हटा दिया जाए ब 5% कोटा की शर्त को पूर्ण रूप से हटा दिया जाए ताकि विभाग अपने तोर पर नियुक्तियाँ दे सके

3) योग्यता के अनुसार आश्रितों को बिना शर्त के सभी श्रेणीयो में नौकरी दी जाऐ !

4) जब किसी महिला आवेदक की शादी हो जाती है तो उसे पॉलिसी से बाहर किया जाता है इस शर्त को भी हटाया जाए

5) जिनके कोर्ट केस वहाल हो गए हैं उन्हे भी नियुक्तियाँ दी जाए

बता दें कि करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी देने के मामला दिन प्रतिदिन जोर पकड़ता जा रहा हैं। पर अभी तक सरकार अपना रवैया स्पष्ट नही कर पायी है। जवकि सरकार के पास विभिन्न विभागों में करुणामूलक के लंबित करीब 4500 से ज्यादा मामले पहुंचे हैं और प्रभावित परिवार करीब 15 साल से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

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