मां शूलिनी मेला विशेष: दो बहनों के मिलन से शुरू होता है हिमाचल का सबसे अनोखा मेला

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तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय मां शूलिनी मेला शुरू, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शांडिल ने किया शुभारंभ

हिमखबर डेस्क

क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा अनोखा मेला भी लगता है, जहाँ अगर आप जेब में सिर्फ बस का किराया लेकर भी पहुँच जाएँ, तो तीन दिनों तक भूखे नहीं रहेंगे? एक ऐसा शहर, जिसका नाम ही उसकी कुलदेवी के नाम पर पड़ा है!

हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर की अधिष्ठात्री देवी माता शूलिनी की। बघाट रियासत के राजा जब सोलन आए, तो वे अपनी कुलदेवी मां शूलिनी को अपने साथ लाए थे। त्रिशूल धारी होने के कारण माता का नाम ‘शूलिनी’ पड़ा। मान्यता है कि जब तक मां शूलिनी खुश हैं, तब तक इस शहर पर कोई प्राकृतिक आपदा या महामारी नहीं आ सकती।

हर साल जून के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय राज्यस्तरीय मेले की कहानी बेहद भावुक है। मेले के पहले दिन, माता शूलिनी अपने मुख्य मंदिर से पालकी में बैठकर, पूरे शहर की परिक्रमा करते हुए गंज बाजार स्थित अपनी बड़ी बहन मां दुर्गा से मिलने पहुंचती हैं। दो बहनों का यह अनोखा मिलन ही इस भव्य मेले की शुरुआत है। अगले 3 दिनों तक माता यहीं रुककर भक्तों को दर्शन देती हैं।

मंदिर के पुजारी रामस्वरूप शर्मा का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी पिछले 200 सालों से माता की सेवा कर रहा है। पहले यह मेला सिर्फ एक दिन का होता था, लेकिन आज यह 1 करोड़ के बजट वाला एक विशाल राष्ट्र स्तरीय उत्सव बन चुका है, जिसकी सांस्कृतिक संध्याएं पूरे हिमाचल में मशहूर हैं।

लेकिन इस मेले को जो चीज सबसे खास बनाती है, वो है यहाँ के लोगों का बड़ा दिल। इन तीन दिनों में पूरे सोलन में दर्जनों भंडारे लगते हैं। आइसक्रीम, खीर, पूड़े से लेकर हर तरह के पकवान मुफ़्त में बांटे जाते हैं। यह हिमाचल का ऐसा इकलौता मेला है जहाँ खान-पान की कोई चिंता नहीं होती।

तो इस बार 26 से 28 जून तक सोलन प्रशासन की देखरेख में सजने वाले इस शूलिनी मेले का हिस्सा जरूर बनें क्योंकि यहां सिर्फ मेला नहीं लगता…यहां सदियों पुरानी आस्था जीवंत होती है। जय माता शूलिनी!

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने आज सोलन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय ऐतिहासिक शूलिनी मेले का विधिवत शुभारम्भ किया। सोलन की अधिष्ठात्री मां शूलिनी को समर्पित यह मेला आस्था और भक्ति का अनुपम उदाहरण है।

राष्ट्रीय स्तरीय यह उत्सव देव परम्परा और जन आस्था का प्रतीक है। मां शूलिनी को समर्पित इस मेले का मुख्य आकर्षण देवी की पालकी यात्रा है। माँ शूलिनी के मंदिर से आरम्भ होकर यह यात्रा सोलन शहर के प्रमुख स्थानों से होते हुए मां की बड़ी बहन मां दुर्गा गंज बाज़ार स्थित मंदिर में विश्रान्ति पाती है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शांडिल ने इस अवसर पर परम्परा के अनुसार मां शूलिनी की पालकी का विधिवत स्वागत किया और जन-जन के सौभाग्य, समृद्धि, स्वास्थ्य और प्रसन्नता की कामना की। उन्होंने इस अवसर पर सोलन वासियों को इस मेले के राष्ट्रीय स्तर का घोषित होने पर बधाई दी।

उन्होंने कहा कि मां शूलिनी को समर्पित यह उत्सव समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। देश में यह एक ऐसा उत्सव है जहां तीन दिन तक अनगिनत भण्डारे आयोजित किए जाते हैं। इस अवधि में सोलन शहर की परिधि में आने वाले हर व्यक्ति को उचित भोजन प्राप्त होता है। डॉ. शांडिल ने आशा जताई कि यह उत्सव सभी के जीवन में नई उमंग का परिचायक बनेगा।

सोलन के उपायुक्त एवं मेला समिति के अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने इससे पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल, दून के विधायक राम कुमार चौधरी और अर्की के विधायक संजय अवस्थी का विधिवत स्वागत किया तथा उन्हें सम्मानित किया। डॉ. शांडिल ने इससे पूर्व सोलन के ऐतिहासिक ठोडो मैदान में मेले के शुभारम्भ से पूर्व आयोजित हवन में भाग लिया।

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