बिना धोए सलाद, अधपका मांस खाने से दिमाग में पहुंचता है कीड़ा, जानें इसलिए पड़ता है मिर्गी का दौरा

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शिमला- जसपाल ठाकुर

बिना धोए सलाद, कच्ची सब्जियां व अधपक्का मांस लोगों में दिमागी कीड़े का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। यह मिर्गी का कारण बनता है। मिर्गी के आ रहे मामलों में सबसे ज्यादा 20 से 50 वर्ष की आयु वालों में देखने को मिल रहे हैं।

मिर्गी का पूरी तरह इलाज संभव है, लेकिन यह इलाज लंबा चलता है और लोग बीच में छोड़ देते हैं। लोग इसे छुपाते भी हैं कि पता चल गया तो विवाह नहीं होगा और इसी डर से इलाज भी नहीं करवाते।

देवभूमि हिमाचल में 21वीं सदी में भी लोग मिर्गी को देवी प्रकोप मानते हैं और इस कारण उपचार न करवा झाडफ़ूंक के चक्कर में पड़े रहते हैं। इस कारण मरीज की जिंदगी दांव पर लग जाती है। प्रदेश के मेडिकल कालेजों व अस्पतालों में न्यूरोलाजी विभाग के चिकित्सकों के पास आ रहे मामलों में सबसे ज्यादा दिमागी कीड़े और मिर्गी के हैं।

सलाद, सब्जियों व अधपक्के मांस के कारण दिमाग का कीड़ा यानी किनिया सोलियम मुंह से प्रवेश करता है और शरीर के अंदर अंडे देता है जो बाद में दिमाग तक पहुंच जाते हैं और मिर्गी का कारण भी बनते हैं। मिर्गी का दौरा पडऩे पर आज भी लोग पुराने तरीके से मरीज के मुंह में चम्मच डालने, पानी पिलाने और जूता सुंघाने का काम करते हैं।

पांच मिनट से अधिक समय तक दौरा न रुके तो तुरंत अस्पताल पहुंचाएं

पांच मिनट से अधिक समय तक मिर्गी का दौरा पड़ता रहे तो यह मरीज के लिए घातक होता है। इसके कारण दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

मिर्गी के कारण

-अनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं।

-किसी भी तरह के हादसे में सिर में चोट।

-मस्तिष्क संबंधी संक्रामक रोग।

-ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक।

-दिमागी कीड़ा।

-अधरंग व लकवा के बाद दिमाग पर असर होना।

ये हैं लक्षण

-हाथ-पैरों का झनझनाना या फडफ़ड़ाना।

-स्वाद, गंध, दृष्टि, श्रवण या स्पर्श इंद्रियों में बदलाव।

-चक्कर आना

-एकतरफ नजर टिकाए रखना।

-कोई प्रतिक्रिया न करना।

-एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना।

डा. सुधीर शर्मा, विभाग अध्यक्ष न्यूरोलाजी, आइजीएमसी शिमला के बोल

मिर्गी के कई कारण हैं, लेकिन ज्यादा मामले दिमागी कीड़े से संबंधित आ रहे हैं। उपचार के लिए आने वाले करीब 150 मरीजों में 45 मिर्गी से संबंधित लक्षणों वाले आ रहे हैं। आज भी लोग झाडफ़ूंक के चक्कर में पड़े रहते हैं और इसे छुपाते हैं। इसकी दवा लंबी चलती है पर यह लाइलाज नहीं है। कभी चम्मच या अंगुली को मरीज के मुंह में न डालें यह रोगी और अपने लिए घातक हो सकता है।

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