कोटला का अपंग परिवार लिफाफे लगाकर गुजर-बसर करने को मजबूर, पीएम की चिट्ठी के बाद भी रोजगार नहीं दे रही सरकार

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कोटला – स्वयंम

प्रधानमंत्री की चिट्ठी के बावजूद दिव्यांगता से त्रस्त परिवार को हिमाचल प्रदेश की सरकार राहत देना तो दूर की बात एक सहानुभूति का पत्र भी नहीं दे सकी। स्वयं (पति – पत्नी) 50 फीसदी और बेटी 80 फ़ीसदी दिव्यांगता का दंड झेलते हुए बेरोजगारी से आजीज आकर प्रदेश के प्रशासन व राजनीतिक स्तर पर अपनी दास्तां बयां करते – करते थक गए। लेकिन झूठे आश्वासनों के सिवा कुछ हासिल न हुआ ।

उन्हें आस थी कि ऐसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी की चिट्ठी तकदीर बदल देगी। लेकिन पता नहीं हिमाचल के मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री की सिफारिश को इतना हल्का क्यों लिया। यह विचारणीय विषय है।

50 फ़ीसदी दिव्यांग दंपत्ति कागज के लिफाफे बनाकर जैसे तैसे गुजर-बसर कर रहे हैं। इनकी बेटी 80 फ़ीसदी दिव्यांग है । और दंपत्ति ने सरकार से उचित रोजगार मुहैया करवाने की गुहार लगाई है । ताकि बेटी का बेहतर उपचार करवा सकें। यह उनके लिए चुनौतियों से कम नहीं है।

शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव में रहेलू का निवासी कमल किशोर अपने ससुराल कोटला में रहता है। कमल की पत्नी आशा माता-पिता की इकलौती संतान है। आशा अपने दोनों टांगों से दिव्यांग है। पति कमल किशोर एक बाजू से पूरी तरह दिव्यांग है जबकि दूसरी बाजू नाममात्र काम करती है।

यह परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती, शाहपुर की विधायक सरवीन चौधरी को लेकर कई उच्च अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। और कांगड़ा के पूर्व जिलाधीश रितेश चौहान के हस्तक्षेप से इस दंपत्ति की बेटी समृति को दिव्यांगता पेंशन लगी है ।

आशा कुमारी का कहना है कि उसने जमा दो तक पढ़ाई की है। उसने नौकरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 29 जुलाई 2015 को एक पत्र लिखा था। उनका जवाब 4 अगस्त 2015 को मिला। इसके बाद उन्होंने एक पत्र तत्कालीन हिमाचल सरकार को भेजा था । कि विकलांग कोटे में नौकरी दी जाए।

मगर अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली। आशा कुमारी कहती है कि एक और सरकार” बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ ” पर जोर दे रही है, लेकिन मेरी बेटी को कोई सहारा नहीं दे रहा है। यहां तक कि हमारे घर तक रास्ता नहीं बना है। जिसके लिए हम कई बार मांग कर चुके हैं।

इस बारे में मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश राम सुभाग सिंह से बात करनी चाही और कई बार उनके मोबाइल व दूरभाष पर बात करने की कोशिश की मगर उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

क्या कहते हैं एसडीएम कृष्ण कुमार शर्मा:

इस बारे में एसडीएम जवाली कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा उक्त अपाहिज परिवार की यथासंभव सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार कोटला को मौका पर भेजा जाएगा तथा उनके घर को जाने वाले रास्ते को पक्का करवाया जाएगा।

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