कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के कारण प्रभावित नहीं होगी सिंचाई व्यवस्था, किसानों के हित सुरक्षित रखने को करवाया जा रहा तकनीकी अध्ययन
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश की बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजना कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार की कवायद के बीच अब प्रशासन और विभाग के सामने एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह चुनौती एयरपोर्ट के आसपास की उस कृषि भूमि की सिंचाई व्यवस्था को बचाए रखने की है, जो विस्तार प्रक्रिया के चलते प्रभावित हो सकती है।
एयरपोर्ट विस्तार की जद में आ रहे छोटे नदी-नालों और सिंचाई के लिए महत्त्वपूर्ण परंपरागत कूहलों को किस तरह व्यवस्थित कर किसानों के खेतों तक निर्बाध रूप से पहुंचाया जाए, इसको लेकर पर्यटन विभाग ने माथापच्ची शुरू कर दी है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता रहे, इसके लिए कई नए विकल्पों पर गंभीरता से तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है।
सिंचाई और जल निकासी की समस्या को सुलझाने के लिए शुरुआती योजना में छोटे-छोटे नालों को चैनेलाइज कर उन्हें मांझी खड्ड में मिलाने का मसौदा तैयार किया गया था, लेकिन यह योजना तकनीकी पेंच में फंसती नजर आ रही है। दरअसल बरसात के दिनों में मांझी खड्ड में पानी का बहाव और जलस्तर काफी अधिक होता है।
ऐसे में छोटी जलधाराओं को खड्ड में मिलाने के लिए एक बड़े और काफी ऊंचाई वाले पुल के निर्माण की आवश्यकता पड़ेगी। मांझी खड्ड के विकल्प में आ रही दिक्कतों के बाद अब विभाग प्लान बी पर काम कर रहा है। इसके तहत मुख्य रूप से दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
पहला एयरपोर्ट परिधि के बाहर बची शेष कृषि भूमि के लिए एक अलग सिंचाई नहर विकसित करना और दूसरा लिफ्ट इरिगेशन (उठाऊ सिंचाई) योजना के माध्यम से सीधे खेतों तक पानी पहुंचाना। गौरतलब है कि एयरपोर्ट विस्तार को लेकर तैयार की गई सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट में भी सिंचाई व्यवस्था के प्रभावित होने की चिंता प्रमुखता से जताई गई थी।
उस दौरान भी परियोजना से बची कृषि भूमि के लिए सिंचाई नहर अथवा ट्यूबवैल उपलब्ध करवाने की मांग सामने आई थी। वर्तमान में किसी भी योजना को अंतिम रूप देने से पहले क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जलधाराओं के मार्ग, पानी के प्रवाह और प्रभावित होने वाली कृषि भूमि का गहन तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है।
किसान हित में होगा फैसला
पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर विनय धीमान ने स्पष्ट किया है कि विभाग किसानों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह सजग है। एयरपोर्ट विस्तार के चलते प्रभावित होने वाली और आसपास की कृषि भूमि की सिंचाई व्यवस्था किसी भी सूरत में बाधित न हो, इसके लिए विभाग सभी विकल्पों का तकनीकी अध्ययन कर रहा है।
छोटे नालों को चैनेलाइज करने के साथ अलग सिंचाई नहर और लिफ्ट इरिगेशन योजना की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है। तकनीकी अध्ययन की रिपोर्ट आने के बाद किसानों के हित में जो भी विकल्प सबसे उपयुक्त होगा, उसे ही अंतिम रूप दिया जाएगा।

