हिमखबर डेस्क
कांगड़ा जिले के आलमपुर क्षेत्र के चार जांबाज अविनेश देबू (36), संदीप उर्फ सोनी (42), विजय कुमार (47) और सुनील कुमार उर्फ नीना (50) किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
हर साल मानसून के दौरान जब ब्यास और न्यूगल नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाता है, तब ये लोग अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों की जिंदगी बचाने का साहसिक कार्य करते हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि दूसरों को मौत के मुंह से निकालने वाले ये हीरो खुद रोजगार और उचित सरकारी सहायता के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जहां सेना भी रही नाकाम, वहां इन्होंने दिखाया दम
इन गोताखोरों की बहादुरी के किस्से इलाके में मशहूर हैं। अब तक ये टीम 10 से ज्यादा लोगों को उफनती लहरों से सुरक्षित बाहर निकाल चुकी है और 12 से ज्यादा शवों को गहरे पानी से खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचा चुकी है।
बीते दिनों भी इन्होंने ब्यास नदी से एक महिला का शव निकालकर मानवता की मिसाल पेश की। इनकी बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण वर्ष 2023 की वह घटना है, जब थुरल के पास न्यूगल खड्ड के बीचों-बीच 8 मजदूर फंस गए थे।
उस समय खड्ड का बहाव इतना तेज था कि सेना का बचाव दल भी वहां पहुंचने में असफल रहा था, लेकिन इन गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला था।
इसके अलावा, लंबागांव के पास फंसे जल शक्ति विभाग के 2 कर्मियों की जान भी इन्होंने ही बचाई थी। जब भी कोई आपात स्थिति आती है, प्रशासन और स्थानीय लोग सबसे पहले इन्हीं को याद करते हैं।
जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किए जा चुके हैं सुनील
टीम का नेतृत्व सुनील कुमार (नीना) करते हैं, जिन्होंने तैराकी की शुरूआत से लेकर अब तक अपने साथियों को भी इस हुनर में पारंगत किया है।
अविनेश देबू और टीम के अन्य सदस्य पिछले 18-20 वर्षों से निरंतर नि:स्वार्थ भाव से समाज सेवा कर रहे हैं। इनके साहस के बदले प्रशासन ने सुनील कुमार को ‘जीवन रक्षा पदक’ से सम्मानित किया है, जबकि बाकी सदस्यों को केवल प्रशंसा पत्र देकर ही इतिश्री कर ली गई।
रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर
समाज के लिए ढाल बनने वाले ये गोताखोर आज खुद रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जिस सम्मान और सरकारी सुविधाओं के ये वास्तविक हकदार हैं, वे अब तक इन्हें नहीं मिल पाई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इन बहादुर गोताखोरों की सुध लेनी चाहिए और उनके भविष्य व रोजगार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी जान जोखिम में डालकर औरों की रक्षा कर सकें।

