हिमखबर डेस्क
प्रधान न्यायाधीश (पारिवारिक न्यायालय) मंडी की अदालत ने पति द्वारा पहली शादी की बात छिपाने और पत्नी के साथ क्रूरता करने के आरोपों को सही पाते हुए उसे पत्नी को 25,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी किया है।
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 144 के तहत पारित किया गया है। मामले के अनुसार, बद्दी (सोलन) निवासी काजल सकलानी का विवाह 29 नवंबर 2023 को संजीव कुमार के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था।
याचिकाकर्ता काजल ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद पति और ससुराल वालों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

काजल ने अदालत को बताया कि संजीव ने अपनी पहली शादी की बात उससे छिपाकर रखी और उसे अंधेरे में रखकर विवाह किया था।
याचिका में कहा गया कि सात नवंबर 2024 को पति, ससुर और ननद ने काजल के साथ बेरहमी से पिटाई की और उसे घर से बाहर निकाल दिया।
तब से वह मायके (गांव कोहल, तहसील बल्ह) में रह रही है। पीड़िता ने बताया कि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है जबकि उसका पति एक बड़ा ट्रांसपोर्टर है, जिसके पास 60 बसें और करोड़ों की संपत्ति है।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संजीव कुमार अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते अदालत ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय के बादशाह बनाम उर्मिला मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी छिपाकर दूसरी महिला को धोखे में रखता है तो वह कानूनन गुजारा भत्ता देने से बच नहीं सकता।
अदालत ने माना कि चूंकि पति ने अपनी संपत्ति और आय का हलफनामा पेश नहीं किया, इसलिए यह माना जाएगा कि उसकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ है।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पति की मासिक आय 50,000 से 75,000 रुपये के बीच होने का अनुमान लगाया। अदालत ने आदेश दिया कि संजीव कुमार पत्नी काजल को याचिका दायर करने की तिथि से हर माह 25,000 रुपये का भुगतान करे।

