रेलवे परामर्श समिति के मेंबर दीपक भारद्वाज के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली कांगड़ा घाटी रेल लाइन के अस्तित्व को बचाने के लिए ‘कांगड़ा घाटी रेल संघर्ष समिति’ देश की राजधानी पहुंच गई है।
समिति के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ और रेल मंत्री कार्यालय पहुंचकर क्षेत्र की मांगों और चिंताओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया।
यह मांग पत्र रेलवे परामर्श कमेटी, उत्तर रेलवे के सदस्य और संघर्ष समिति के सदस्य दीपक भारद्वाज द्वारा दिया गया।इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्रालय से ज्ञापन की आधिकारिक रिसीविंग भी प्राप्त की।

दीपक भारद्वाज के बोल
दीपक भारद्वाज ने बताया कि कांगड़ा रेल केवल परिवहन का एक माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रेलवे परामर्श कमेटी का सदस्य बनने के बाद से ही कांगड़ा रेल और जर्जर हालत में पड़े चक्की पुल का मुद्दा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है।
भारद्वाज ने बताया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने लोकसभा में भी इस संबंध में प्रश्न लगवाने के लिए विभिन्न सांसदों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर निवेदन किया है।
जनसमर्थन से संघर्ष को शक्ति
समिति ने स्पष्ट किया कि जमीन स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियान के कारण आज यह मुद्दा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। दीपक भारद्वाज के अनुसार संघर्ष समिति ने आने वाली पीढिय़ों को यह संदेश दिया है कि अपनी धरोहर की रक्षा के लिए संगठित होकर लडऩा जरूरी है।
सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
व्यस्तता के चलते रेल मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के बाद समिति काफी उत्साहित है। समिति को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार कांगड़ा घाटी रेल लाइन के सुदृढ़ीकरण और विकास के लिए शीघ्र ही ठोस निर्णय लेगी।

