मलोट के जंगल में धड़ल्ले से हो रहा खैर के पेड़ों का अवैध कटान, वन रक्षक पर मिलीभगत के गंभीर आरोप

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हिमखबर डेस्क

जहां एक तरफ उच्चाधिकारी वन क्षेत्र इंदौरा में अवैध कटान पर लगाम कसने के लिए वैध खैर कटान तक पर रोक लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मलोट वन बीट में खुलेआम खैर के हरे-भरे पेड़ों पर आरी चल रही है और हैरानी की बात यह कि यह सब कथित तौर पर वन रक्षकों की मिलीभगत से हो रहा है। सूत्रों के अनुसार मलोट क्षेत्र में करीब एक दर्जन खैर के पेड़ों को काटकर तस्करी का खेल रचा गया है। ऊपर बैठे अधिकारियों को सब कुछ ठीक है का झूठा भरोसा दिया जा रहा है, जबकि अंदरखाने जंगल का सीना चीरकर अवैध कमाई की जा रही है।

शाम को महफिल, रात को कटान

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ वन रक्षक शाम ढलते ही कथित तस्करों के साथ बैठकों में शामिल होते हैं, शराब की महफिल में जाम छलकाए जाते हैं और फिर रात के अंधेरे में पेड़ों पर आरी चलती है। यानी संरक्षण की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वही जंगल के दुश्मन बन बैठे हैं।

बोलने पर मिलती है धमकी

मलोट के कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर कोई इस अवैध कटान पर सवाल उठाए, तो संबंधित वन रक्षक बदतमीजी पर उतर आता है और धमकाने से भी पीछे नहीं हटता। “गांव के लोग पीछे लगा दूंगा” जैसी धमकियां आम हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे कौन से ग्रामीण हैं, जो अवैध खैर कटान में वन रक्षक के साथ खड़े हैं।

पत्रकार को धमकाया

जब एक समाचार पत्र के पत्रकार ने इस मामले पर सवाल उठाने की कोशिश की तो उसे भी अभद्र भाषा और धमकियों का सामना करना पड़ा। यह दर्शाता है कि मामला कितना संवेदनशील और गंभीर हो चुका है। हालांकि उक्त पत्रकार ने इस संदर्भ में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है।

अधिकारी सक्रिय, लेकिन सिस्टम में सेंध

हालांकि आरओ अब्दुल हमीद के कार्यभार संभालने के बाद गश्त बढ़ी है और कुछ हद तक अवैध कटान पर रोक लगी है, लेकिन बावजूद इसके, कुछ निचले स्तर के कर्मचारी कथित तौर पर पूरे सिस्टम को भीतर से खोखला कर रहे हैं। मलोट में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार अवैध कटान के मामले सामने आ चुके हैं। यदि गहराई से जांच की जाए तो जंगल के भीतर बड़े स्तर पर चल रहे इस काले खेल का पर्दाफाश हो सकता है।

सूत्र बताते हैं कि इंदपुर, बलीर, राजा खासा, चोचर, डमटाल, डैंकवां, टक्कू वाली माता मंदिर क्षेत्र, जनेरा, थाथ और ध्याला जैसे इलाकों में भी अवैध कटान का जाल फैला हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जंगल की रक्षा करने वाले ही उसे लूटने लगें तो पर्यावरण संरक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह जाएगा।

क्या कहते हैं वन मंडल अधिकारी

वहीं जब इस बारे वन मंडल अधिकारी नूरपुर संदीप कोहली से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि मलोट में हुए अवैध कटान की जानकारी सुबह ही मिली है, टीम को मौके पर भेजकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध कटान स्वीकार्य नहीं होगा।

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