आधी आबादी पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, यह वायरस ले रहा हर 8 मिनट में एक जान

--Advertisement--

महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर- सर्वाइकल कैंसर, 98% तक बचाव संभव, फिर भी लापरवाही भारी, हिमाचल में 65 हजार बेटियों को लगेगा सुरक्षा कवच, आधी आबादी के लिए बड़ी चेतावनी, महिलाओं में बढ़ रही यह गंभीर बीमारी, हर 8 मिनट में ये वायरस ले रहा 1 जान, छोटी सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा, क्या टीकाकरण अभियान से कम होगा सर्वाइकल कैंसर का खतरा, जानिए सर्वाइकल कैंसर के बारे में सब कुछ इस रिपोर्ट में

हिमखबर डेस्क

खास खबर में आज बात एक ऐसी गंभीर बीमारी पर करेंगे जिसकी न दर्द से शुरुआत होती है, न तेज़ बुखार से.. लेकिन एक खामौश कातिक की तरह धीरे-धीरे, चुपचाप शरीर के भीतर यह पनपती है  और जब तक अहसास होता है, तब तक अक्सर देर हो चुकी होती है।

ये कुछ और नहीं बल्कि सर्वाइकल कैंसर है, बीते 2- 4 दिनों में आपने सर्वाइकल कैंसर का खूब नाम सुना होगा। यह आज भी भारत में महिलाओं की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर बना हुआ है, जिसके हर साल लगभग 80,000 नए मामले और 42,000 से ज्यादा मौतें होती हैं। वहीं दुनिया भर में हर साल लगभग 6 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं और करीब 3 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत हो जाती है, तो सोचिए ये कैंसर कितना खतरनाक है।

लेकिन अब तक विडंबना ये थी कि ये जितना बड़ा मसला है उतना लोग इसे लेकर जागरूक नहीं हैं। हो सकता है बहुत से महिलाओ को तो सर्वाइकल कैंसर असल में है क्या इस बारे में पता भी न हो। चलिए आसान भाषा में हम आपको इसके बारे में- सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से, यानी ग्रीवा (सर्विक्स) में होने वाला कैंसर है। इसका मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) नामक संक्रमण है।

यह संक्रमण अक्सर लंबे समय तक बिना लक्षण के रहता है,  इसलिए रेगुलर चेकअप बहुत जरूरी है। बाकी कैंसर की तरह इसकी भी 4 स्टेज होती है। पहली स्टेज शुरुआती अवस्था और Stage 4: एडवांस स्टेज जहां मरीज को स्पेशल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि राहत की बात ये है कि सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा कैंसरों में से है जिन्हें समय रहते जागरूकता जांच और टीकाकरण से रोका जा सकता है।

इसी सर्वाइकल कैंसर से लड़ने के लिए देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को किया।  इस अभियान के तहत देशभर में 14 वर्ष की करीब 1.15 करोड़ किशोरियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त HPV वैक्सीन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वहीं हिमाचल की सुक्खू सरकार भी इस अभियान में केंद्र के साथ है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज आईजीएमसी शिमला से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए राज्य स्तरीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ किया. हिमाचल में अगले 90 दिनों में 14 वर्ष की आयु की 65000 लड़कियों को यह टीका लगाया जाएगा। ताकि हिमाचल जहां पर पहले की कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है वहां पर सर्वाइकल कैंसर को पैर पसारने का मौका न मिल सके।

जानकारी के अनुसार HPV वैक्सीन वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से लगभग 98 प्रतिशत तक बचा सकती है। यह बेहद असरदार वैक्सीन है, कम उम्र में शरीर का इम्यून सिस्टम अच्छा रिस्पॉन्स देता है, इसलिए 14 साल तक की लड़कियों के लिए एक ही डोज पर्याप्त मानी गई है। वहीं 15 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र की लड़कियों को 2 से 3 डोज की जरूरत पड़ सकती है। यह वैक्सीन 26 वर्ष तक की उम्र में सबसे अधिक प्रभावी रहती है। ज्यादा उम्र में भी डॉक्टर की सलाह लेकर महिलाएं यह वैक्सीन लगवा सकती हैं।

हमे सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है  क्योंकि इस कैंसर की वजह से हर 8 मिनट में किसी न किसी महिला की जान जा रही है। सर्वाइकल कैंसर की सबसे डरावनी बात यह है कि यह धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ता है। शुरुआती चरण में अक्सर कोई खास संकेत नहीं मिलता और जब लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक कई बार बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर के कुछ चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये संकेत खतरे की घंटी हो सकते हैं। जैसे पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज के बाद असामान्य रक्तस्राव, यौन संबंध के बाद असामान्य ब्लीडिंग, बदबूदार पानी या ब्लड स्ट्रीम डिस्चार्ज, या फिर बहुत ज्यादा कमर दर्द होना। इन तमाम लक्षणों को “सामान्य समस्या” समझकर टाल देना घातक साबित हो सकता है।

भारत में ये इतना खतरनाक इसलिए है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी जागरूकता की कमी है, नियमित स्क्रीनिंग का अभाव है. और सबसे बड़ा कारण है कि महिलाएं अपनी सेहत को प्राथमिकता ही नहीं देती। कई महिलाएं तब तक डॉक्टर के पास नहीं जातीं, जब तक दर्द असहनीय न हो जाए। यही देरी जानलेवा साबित होती है।

30 वर्ष की आयु के बाद नियमित जांच से कैंसर बनने से पहले की असामान्य कोशिकाओं का पता लगाया जा सकता है क्योंकि इस कैंसर की पहचान शुरुआती या प्री-कैंसर अवस्था में भी संभव है और समय पर इलाज से जान बच सकती है, वरना ये अब तक लाखों परिवारों को तबाह कर चुकी है।

हालांकि अब सरकारों ने इस पर ध्यान दिया है। केंद्र से लेकर राज्य सरकारें अब टीकाकरण पर जोर दे रही हैं। खैर अब देखना होगा कि सरकार का चलाया अभियान क्या सफल हो पाता है क्या सर्वाइकल कैंसर से हम जंग जीत पाते हैं या नहीं।

--Advertisement--
--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related