हिमखबर डेस्क
नगरोटा सूरियां, कथोली, सुगनाड़ा और बासा पंचायतों को मिलाकर नगरोटा सूरियां नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। शहरी विकास विभाग द्वारा 25 फरवरी को जारी नवीनतम अधिसूचना को संघर्ष समिति ने जनता की इच्छा के विरुद्ध और राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला करार दिया है।
शहरी विकास विभाग ने 14 महीने के लंबित प्रस्ताव के बाद नगरोटा सूरियां को नगर पंचायत के गठन के लिए एक नई अधिसूचना जारी की है। 25 फरवरी को जारी यह नवीनतम अधिसूचना विभाग की 20 दिसंबर 2024 को जारी अधिसूचना का ही अगला भाग है। प्रस्तावित नगर पंचायत 26 दिसंबर 2024 को राज्य राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी थी।
संघर्ष समिति के नेतृत्वकर्ता एवं पूर्व प्रधान संजय महाजन ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1994 के तहत किसी भी नगर निकाय के गठन के लिए न्यूनतम पांच लाख रुपये की वार्षिक आय अनिवार्य है, जिसे ये पंचायतें पूरा नहीं करतीं।
उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद विभाग ने 15 याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर नहीं दिया। केवल दो लोगों की बात सुनकर ही निर्णय थोप दिया। पूर्व जन प्रतिनिधियों रजनी महाजन, जीएस बेदी, सुरेखा और प्रवीण कुमार ने संयुक्त बयान में कहा कि जनभावनाओं के विपरीत लिया गया।
यह निर्णय आने वाले पंचायत, नगर निकाय और विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल के लिए भारी पड़ेगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।

