अलविदा कामरेड सीताराम येचुरी

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शिमला – नितिश पठानियां

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया अपने प्यारे साथी, एस.एफ. आई. पूर्व अखिल भारतीय अध्यक्ष और सी पी आई (एम ) के महासचिव सीताराम येचुरी के सम्मान में अपने सांगठनिक ध्वज को झुकाता है। कॉमरेड सीताराम येचुरी ने अपना सार्वजनिक जीवन एक जीवंत नेता और छात्र आंदोलन के संगठनकर्ता के रूप में शुरू किया।

वह दिल्ली में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान एसएफआई के सदस्य बने और बाद के वर्षों में जेएनयू में छात्रों के सबसे लोकप्रिय और ऊर्जावान नेताओं में से एक के रूप में उभरे। आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में जेएनयू के छात्रों को एकजुट करने में सीताराम येचुरी ने अहम भूमिका निभाई। वह लगातार तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए।

कॉमरेड सीताराम येचुरी को 1984 में दमदम में हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के 5वें अखिल भारतीय सम्मलेन द्वारा अध्यक्ष चुना गया था और 1986 में विजयवाड़ा में 6वें अखिल भारतीय सम्मेलन तक उन्होंने कार्य किया।

उन्होंने 1980 से 1986 तक स्टूडेंट स्ट्रगल पत्रिका के संपादक के रूप में भी कार्य किया। वे इस पत्रिका के अब तक के सबसे लंबे समय तक सेवारत संपादक रहे हैँ। उन्हें 2015 में सीपीआई (एम) के महासचिव चुना गया था। कॉमरेड सीताराम 2005 में सांसद चुने गए और 2017 तक कार्यरत रहे।

1975 के आपातकाल के खिलाफ कॉमरेड सीताराम येचुरी द्वारा छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया गया, जिस आंदोलन के फलस्वरुप प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी को जेएनयू के चांसलर के पद से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा, यह देश में छात्र आंदोलन की विशिष्ट घटनाओं में से एक है।

लोकतंत्र और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष आदर्शों के लिए संघर्ष में सीताराम हमेशा आगे रहे। वह देश में मेहनतकश जनता के नेता बने और उन्होंने उनके बेहतर जीवन के लिए संघर्ष किया। संसद के अंदर एक सांसद के रूप में और बाहर गरीबों के नेता के रूप में, उन्होंने भारत में श्रमिक वर्ग के लिए महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किए।

उन्होंने भारत के संविधान की रक्षा की लड़ाई में देश की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करने में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारत में फासीवादी और कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ अथक संघर्ष का नेतृत्व किया।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया कॉमरेड सीताराम येचुरी के जीवन और छात्र आंदोलन तथा देश की मेहनतकश जनता के लिए संघर्ष में उनके योगदान का सम्मान करता है। उनका योगदान हमेशा एस.एफ.आई. और भारत के लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी आदर्शों के लिए लड़ने वाले अन्य सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। एस.एफ.आई. केंद्रीय कार्यकारी समिति कॉमरेड सीताराम येचुरी के निधन पर शोक व्यक्त करती है।

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