अमृतकाल की जरूरत है स्वामी विवेकानंद की संचार नीति: प्रो. अग्निहोत्री
धर्मशाला – हिमखबर डेस्क
देश अब अमृतकाल में प्रवेश कर गया है और उसके सामने अवसर एवं चुनौतियां दोनों बढ़ गई हैं। अवसरों का लाभ उठाने के लिए और चुनौतियों का सामना करने के लिए संचार पक्ष का मजबूत होना आवश्यक है। स्वामी विवेकानंद की संचार नीति में भारतीय संचार प्रवाह को सशक्त करने के सभी गुण मौजूद हैं।
ये बातें हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने कहीं। वह स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर डॉ. रविंद्र सिंह की पुस्तक “स्वामी विवेकानंद की संचार नीति” के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री ने कहा कि भक्तिकाल के सभी संत-महापुरुषों की संचार नीति पर कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संघर्ष काल में साधु-संतों ने भारतीय समाज और संस्कृति को कैसे जीवित बनाए रखा।
डॉ. रविंद्र सिंह की पुस्तक सभी संत-महापुरुषों के संचारीय अध्ययन के लिए आधारभूमि उपलब्ध करवाती है। इस अवसर पर बनवीर सिंह राणा, डॉ. जयप्रकाश सिंह, हरिश्चंद्र ठाकुर आदि उपस्थित रहे।
डॉ. रविंद्र सिंह की किताब “स्वामी विवेकानंद की संचार नीति” ग्लोबुक प्रकाशन आगरा से प्रकाशित हुई है। इसमें स्वामी विवेकानंद के संचार मूल्यों एवं सिद्धांतों का वर्णन किया गया है।
किताब में स्वामी विवेकानंद के शिकागो सम्मेलन में दिए भाषण के वैश्विक एवं भारतीय समाज पर पड़े प्रभाव का विशेष रूप से विश्लेषण किया गया है।

