मॉलदीव-लक्षद्वीप की तरह सुंदर है काँगड़ा का ये टूरिस्ट स्पॉट, बीच-समंदर की आती है फिलिंग, साल में 8 माह डूबे रहते हैं यहां पर बने मंदिर

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हिमखबर डेस्क

हाल ही में मॉलदीव के मंत्रियों की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी पर अमर्यादित टिप्पणियां की गई. इस मुद्दे ने काफी सुर्खियां बटोरी. जमकर बवाल हुआ. भारतीय टूरिस्ट ने मॉलदीव का बॉयकॉट कर दिया. मॉलदीव सरकार ने तुरंत तीन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया.

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वहीं, भारत में लक्षद्वीप ट्रेंड में आ गया. पीएम मोदी की इसी टापू की यात्रा पर मॉलदीप को मिर्ची लगी थी. लेकिन अब हम आपको हिमाचल प्रदेश के उस इलाके के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां समंदर और बीच जैसी फीलिंग आती है. यहां पर मॉलदीव जैसा नजारा दिखता है.

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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के फतेहपुर में एक इलाका आता है. जो कि पौंग डैम झील से घिरा हुआ है. यहां पर बाथू की लड़ी है. जहां पर बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं. यहां पर बाथू की लड़ी में झील में मंदिर भी हैं, जो साल में केवल चार महीने ही नजर आते हैं औऱ आठ महीने पानी में डूबे रहते हैं.

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यहां पर समंदर की तरह नीला पानी है और दूर दूर तक खाली तलहटी नजर आती है. यहां पर बड़ी संख्या में विदेशी परिंदे भी हर साल नजर आते हैं. जब पानी कम होता है तो फिर मंदिर तक लोग पहुंचे हैं. ऐसे नाव के जरिये इस झील की सैर करते हैं.

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जानकारी के अवुसार, फरवरी से जुलाई तक 4 माह ही इन मंदिरों में भक्तों को प्रभु के दर्शन होते हैं. बाथू मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा, अन्य आठ छोटे मंदिर भी हैं. इन्हें दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे ये एक माला में पिरोया गए हों., इसलिए इसे बाथू की लड़ी (माला) कहा जाता है.

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माना जाता है कि इन मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था. क्योंकि अज्ञातवास के दौरान वे रुके थे और स्वर्ग की सीढ़ी बनाने की कोशिश की थी. इस मंदिर के पास 40 सीढ़ियां आज भी मौजूद हैं. कुछ लोग इस मंदिर को स्‍थानीय राजा द्वारा बनवाने की बात कहते हैं.

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मंदिरों में विष्णु भगवान की मूर्तियां हैं और बीच में एक मुख्य मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति है. कुछ लोग इसे भगवान विष्णु, तो मंदिर की शैली और बनावट को देखते हुए इसे शिव मंदिर भी माना गया है. मंदिर में इस्तेमाल पत्थर, शिलाओं पर भगवान विष्णु, शेष नाग और देवियों इत्यादि की कलाकृतियां हैं. यह मंदिर बाथू नाम के शक्तिशाली पत्‍थर से बना है.

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बताते हैं कि चालीस साल पहले जब पौंग डैम बना तो उसके बाद से ये मंदिर डूबने शुरू हुए. इसे मिनी गोवा भी कहा जाता है. यहां पर बीच की फीलिंग भी आती है.

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यदि कोई सैलानी यहां घूमने जाना चाहता है तो अप्रैल से जून तक का समय अच्‍छा है. मंदिर तक नाव से ही पहुंचा जा सकता है. यहां वन विभाग का एक गेस्‍ट हाउस भी है.

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दिल्ली से धर्मशाला के गग्‍गल एयरपोर्ट के जरिये यहां जल्दी से पहुंच सकते हैं. इसके अलावा, कांगड़ा से टैक्सी भी मिल जाएगी. पंजाब के पठानकोट से यहां की दूरी 150 किमी है.

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