चीन सीमा पर तैनात सैनिक ने एक साथ दी मां और भाई को मुखाग्नि, बिलख रही थी घाटी

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हमीरपुर, 09 जनवरी – अनिल कपलेश

जमीन का हिस्सा यहीं रह गया, लेकिन 5 मिनट का गुस्सा 2 परिवारों को तबाह कर गया। अगर संयम बरतते हुए पूर्व सैनिक ने आपा न खोया होता तो यह घटना न हुई होती। समूची घाटी उस समय सिहर उठी जब लेह में तैनात सैनिक ने मां-बेटे की चिता को एक साथ मुखाग्नि दी।

मां व भाई की हत्या की सूचना मिलने के बाद फौजी लेह से घर आया था। अंतिम संस्कार के दौरान आर्मी में तैनात मृतक महिला के बड़े बेटे अरुण कटोच ने जैसे ही माता व भाई की अर्थी को देखा तो उसकी चीख पुकार से समूचा गांव गमगीन हो उठा।
सगे-संबंधियों एवं ग्रामीणों ने उसे ढांढस बंधाया। इसके बाद रविवार शाम हिंदू रीति-रिवाज के साथ मां-बेटे की अर्थी को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां अरुण कटोच ने अपनी माता व अपने छोटे भाई कर्ण कटोच को मुखाग्नि दी।
हालांकि महिला व युवक ने गोली लगने के कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया था लेकिन गमगीन परिवार को रविवार को शव सौंपे गए थे। बता दे कि हादसे में फौजी की पत्नी ममता देवी बाल-बाल बची।
सुजानपुर थाना के तहत पड़ते बीड़ गांव में हुए गोलीकांड के जख्म ताजा है। आखिर जमीन के एक भूखंड के लिए 2 परिवारों में चली तनातनी का इस तरह दुखद अंत होगा, ऐसा किसी ने भी सोचा भी नहीं था।

हैरत है कि जमीन के लिए 2 परिवारों के बीच सालों से आए दिन लड़ाई-झगड़ा होना आम बात हो गई थी तथा मामला पंचायत, पुलिस थाना से लेकर प्रशासन के द्वार पहुंचा था लेकिन कोई भी अपने स्तर पर इस मामले को शांत नहीं करवा पाया। निश्चित तौर पर अगर पंचायत या सरकारी अमले ने थोड़ी-सी  संजीदगी समझी होती तो नौबत यहां तक न पहुंचती।

मां व बेटे की अर्थियां एक साथ उठीं तो माहौल गमगीन हो गया। बंदूक की गोली से मारे गए मां-बेटे के शवों का अंतिम संस्कार तो कर दिया गया,लेकिन सनसनीखेज वारदात ताउम्र के जख्म छोड़ गई है।

बताते चलें कि बीते शुक्रवार की देर शाम को बगेहड़ा पंचायत के बीड़ गांव में जमीनी विवाद के चलते पूर्व सैनिक चंचल सिंह जम्वाल ने विमला देवी व उसके बेटे कर्ण कटोच को गोली मार दी थी।

गोलीकांड में विमला देवी के पति अजीत कटोच व बहू ममता देवी भी घायल हो गए थे, जिनका इलाज मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में हुआ।

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