सरकारें बदलीं, पर पास्सू में नहीं बन पाया ओबीसी भवन

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सात साल में मात्र पिल्लर ही बने, मांझी खड्ड के करीब बने ओबीसी भवन पर मंडरा सकता है खतरा, आज तक सिरे नहीं चढ़ी योजना

व्यूरो रिपोर्ट

पर्यटन स्थल धर्मशाला में दो बार सरकार बदल चुकी है, परंतु अभी तक धर्मशाला में स्थित शिल्ला के पास्सू में करीब सात सालों से बन रहा ओबीसी भवन अभी तक तैयार नहीं हो पाया है।

ओबीसी भवन का निर्माण मांझी खड्ड के पास का स्थान समुदाय के लोगों के हित में रख निर्धारित किया गया था, परंतु धर्मशाला के मकलोडगंज से 12 जुलाई, 2021 की रात में आई बाढ़ ने चिंता में डाल दिया है। बाढ़ के कारण पास्सू स्कूल को काफी नुक्सान हुआ था।

अब वही खतरा भवन पर भी मंडरा रहा है। धर्मशाला में पिछले पांच सालों में बहुत सी नई योजनाएं का शिलान्यास हुआ, लेकिन आज दिन तक वह सिरे नहीं चढ़ पाईं। इनमें से कई योजनाओं की शिलान्यास पट्टिकाएं तक गायब हो चुकी हैं।

जिला मुख्यालय के साथ लगती ग्राम पंचायत पंतेहड़ पास्सू में पिछले करीब सात साल से सरकार की अनदेखी का शिकार ओबीसी सामुदायिक भवन हुआ है। धर्मशाला-कांगड़ा वाया शिल्ला सडक़ मार्ग के साथ लगते मैदान में बन रहे इस भवन के पिछले सात साल से खड़े कंकरीट के पिल्लर ही नजर आ रहे हैं, जबकि इसके धरातल को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

सामुदायिक भवन के धरातल पर अब झाडिय़ों ने अपना कब्जा जमा लिया है। हैरानी इस बात की है कि ओबीसी सामुदायिक भवन में पिल्लर सडक़ से साफ दिखाई देते हैं। इस रास्ते से कई बार बड़ी हस्तियों सहित क्रिकेट मैच खेलने आने वाली टीमों के खिलाड़ी भी इसी रास्ते हो कर गुजरे हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री का काफिला पांच वर्ष न जाने कितनी बार इस सडक़ मार्ग से होकर गुजरा है। बावजूद इसके पिछले सात साल में इस भवन का काम पिल्लरों से आगे नहीं बढ़ पाया है। भवन के प्रस्तावित अनुसार यहां एक बड़ा हाल और दस के करीब कमरे बनने थे।

भवन के लिए लोगों की मांग को देखते हुए पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने 40 लाख रुपए और पूर्व जिला परिषद सदस्य हरभजन सिंह ने करीब 10 लाख रुपए मुहैया करवाए थे, लेकिन भवन के लिए बजट का उचित प्रावधान न होने के कारण व पैसों की कमी के कारण यह भवन पिल्लरों से ऊपर नहीं उठ पाया है।

नई सरकार से आस

ग्राम पंचायत पास्सू पंतेहड़ के प्रधान व उपप्रधान ने आने वाली सरकार से मांग और उम्मीद जताई है कि प्रदेश में अब जो भी नई सरकार बनेगी, वह इन मुंह चिढ़ाते पिल्लरों से निजात दिलाएगी। पिछले सात वर्षों से इस भवन निर्माण में एक ईंट तक नहीं लग पाई है, जिससे लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उम्मीद है कि आगे जो भी जनप्रतिनिधि धर्मशाला का प्रतिनिधित्व करेगा, इसके निर्माण बारे जरूर सोचेगा।

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