रन-वे से पहले एयरपोर्ट प्रभावित परिवारों को घर, एयरपोर्ट का 3010 मीटर बनेगा रन-वे

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कांगड़ा हवाई अड्डा विस्थापितों के पुनर्वास को प्राथमिकता।

हिमखबर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी एवं महत्त्वाकांक्षी परियोजना कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर अब प्रशासनिक मशीनरी ने विस्थापितों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन (आर एंड आर) पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है।

प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि हवाई पट्टी की लंबाई बढऩे से पहले, प्रभावित होने वाले परिवारों का घर और भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

इसी दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए, प्रशासन ने सात राजस्व गांवों के लिए अवार्ड तैयार कर लिए हैं, जिससे विस्थापितों को मिलने वाली राहत राशि का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित होने वाले करीब 942 परिवारों के लिए पुनर्वास की योजना को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विकास की इस दौड़ में किसी भी परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। विस्थापितों को न केवल उनकी भूमि का उचित मूल्य दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें नई जगह बसने और अपनी व्यवस्थाएं सुचारू करने के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।

परियोजना के पहले चरण के तहत भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग अंतिम चरण में है। अब तक प्रशासन की ओर से करीब 1960 करोड़ रुपए की भारी-भरकम मुआवजा राशि प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

जिन भू-स्वामियों ने अपने सभी आवश्यक दस्तावेज और शपथ पत्र जमा कर दिए थे, उन्हें भुगतान कर दिया है। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी करते हुए कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रभावित परिवार सहायता से वंचित न रहे।

एयरपोर्ट का 3010 मीटर बनेगा रन-वे

विस्थापन के इस कठिन दौर के पीछे कांगड़ा के सुनहरे भविष्य की तस्वीर छिपी है। वर्तमान में महज 1376 मीटर लंबे रन-वे को बढ़ाकर 3010 मीटर किया जा रहा है।

इस विस्तार के बाद कांगड़ा एयरपोर्ट पर बड़े विमानों की लैंडिंग संभव होगी, जिससे न केवल हवाई टिकट सस्ते होंगे, बल्कि पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। लगभग 150 हेक्टेयर भूमि पर फैलने वाला यह नया रनवे पूरे हिमाचल की आर्थिकी को नई गति देने वाला साबित होगा।

हर परिवार का ख्याल

उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी करते हुए कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रभावित परिवार सहायता से वंचित न रहे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आर एंड आर प्रक्रिया को बेहद संवेदनशीलता के साथ पूरा किया जा रहा है, जिससे विकास और विस्थापन के बीच एक मानवीय संतुलन बना रहे।

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