बारिश ने उजड़ने से बचाई कनक और सरसों की फसल

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बकलोह- भूषण गुरुंग

दो दिनों से हो रही हल्की बारिश से बक्लोह के किसानों मे कुछ आस जगी है। क्योंकि कनक और सरसों की फसल उजड़ने के कगार में आ चुकी थी। जब से किसानों ने अपने अपने खेतो मे कनक की बिजाई की थी। तब से बारिश का नामो निशान तक नही था। सोमबार रात से हल्की हल्की बारिश होने से किसानों ने राहत की सास ली है।

जब इस बाबत देवीगाऊ के एक छोटे से किसान राम नारायण से पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी खेतो मे लगभग बीस किलो गेहू के बीज बोए थे। उसमे अस्सी प्रतिशत ही बीज अंकुरित हुय थे। उसमे भी लगभग तीस प्रतिशत के करीब फसल कुछ जंगली जानबर चट गए। और कुछ बीज जो अंकुरित हुए थे।वो भी ठंड में पाला पड़ने से पीले पढ़ गए। अभी जो दो दिनों से बारिश हुई है । कुछ हद तक फसल की पैदा बार ठीक होने की आस बंधी है।

वही होभार गॉव के किसान अशोक कुमार का कहना है। कि बारिश लेट होने से इस बार गेहू और सरसों की फसल कम होना की सम्भवना है। यदि यही वारिश नवंबर के दूसरे सप्ताह मे हो जाता तो शायद कनक की बम्पर फसल होने की आस होती। अभी तो वही फसल होंगे जो खेतो मे बची हुई है। फिर भी समय समय में बारिश होते रहे तो फसल ठीक होने की सम्भबना है।

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