हिमखबर डेस्क
आधुनिकता के इस दौर में जहां कई लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, वहीं सोलन जिले के देवठी क्षेत्र का चौंरा गांव आज भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्थाओं को संजोए हुए है। क्षेत्र में लंबे समय से पर्याप्त वर्षा न होने और सूखे जैसी स्थिति बनने के कारण ग्रामीणों ने सदियों पुरानी जोगड़ा परंपरा का आयोजन शुरू किया है।
इस परंपरा के माध्यम से गांव के लोग वर्षा के देवता इंद्र से अच्छी बारिश और खुशहाली की प्रार्थना कर रहे हैं। चौंरा गांव में इन दिनों पारंपरिक जोगड़ा दल सक्रिय है। दल के सदस्य गांव-गांव और घर-घर जाकर लोकगीतों का गायन कर रहे हैं तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ इंद्र देव का स्मरण कर रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि जब भी क्षेत्र में वर्षा की कमी होती है या सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तब सामूहिक रूप से जोगड़ा परंपरा का निर्वहन किया जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोगों को एकजुट करने और प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम भी है।
गांव के बुजुर्गों का कहना हैं कि यह परंपरा पीढिय़ों से चली आ रही है। पहले के समय में जब मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं होती थी और खेती पूरी तरह प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर रहती थी, तब लोग इंद्र देव की आराधना कर अच्छी वर्षा की कामना करते थे।
समय बदला, तकनीक विकसित हुई, लेकिन चौंरा गांव के लोगों ने अपनी इस सांस्कृतिक धरोहर को आज भी जीवित रखा है।जोगड़ा पार्टी चौंरा के प्रमुख रमेश शर्मा ने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों से विरासत के रूप में मिली है।
उन्होंने कहा कि गांव के लोग सामूहिक रूप से इस आयोजन में भाग लेते हैं और इंद्र देव से क्षेत्र में अच्छी वर्षा, समृद्ध फसल और जनकल्याण की कामना करते हैं। उनका कहना है कि जोगड़ा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि गांव की पहचान और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।
गौरतलब रहे कि प्रदेश की देव संस्कृति में प्रकृति और देवी-देवताओं का विशेष स्थान है। प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी वर्षा, अच्छी फसल और सुख-समृद्धि के लिए विभिन्न लोक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। जोगड़ा भी ऐसी ही एक प्राचीन परंपरा है, जो लोगों को अपनी जड़ों से जोडऩे का कार्य करती है।
चौंरा गांव में आयोजित यह जोगड़ा परंपरा न केवल वर्षा की कामना का माध्यम बनी हुई है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोकगीतों और परंपराओं से परिचित कराने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इंद्रदेव की कृपा से क्षेत्र में जल्द अच्छी वर्षा होगी और खेत-खलिहान फिर से हरियाली से भर उठेंगे।

