काँगड़ा – राजीव जस्वाल
डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के कार्डियोलाजी विभाग में कोरोनरी स्टेंट और उससे जुड़े उपकरणों की खरीद में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) की जांच रिपोर्ट में पता चला है कि ई-टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कंपनियों के स्टेंट बाद में मरीजों को लगाए जाते रहे।
निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान ने 14 जुलाई को रिपोर्ट प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है। रिपोर्ट के अनुसार, टांडा मेडिकल कालेज के प्राचार्य की ओर से 20 मार्च और 14 मई 2026 को भेजे पत्रों तथा दस्तावेजों के आधार पर मामले की समीक्षा की।
इससे पहले 10 अप्रैल को कार्डियोलाजी विभाग की कार्यप्रणाली और खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं संबंधी शिकायत मिलने पर डीएमईआर ने 28 अप्रैल को जांच समिति गठित की थी।
जांच में क्या सामने आया
जांच में सामने आया कि कोरोनरी स्टेंट और एक्सेसरीज की खरीद के लिए जारी ई-टेंडर में 12 कंपनियों ने भाग लिया था। तकनीकी मूल्यांकन के दौरान कार्डियोलाजी विभाग ने नौ कंपनियों को अयोग्य घोषित कर दिया। लेकिन बाद में इन्हीं कंपनियों द्वारा निर्मित स्टेंट अमृत फार्मेसी के माध्यम से केस-टू-केस आधार पर वाउचर के जरिए खरीदे और मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किए जाते रहे।
ऑडिट टीम ने जताई आपत्ति
रिपोर्ट में कहा है कि इस खरीद प्रक्रिया पर स्थानीय आडिट टीम ने आपत्ति दर्ज की। आडिट के अनुसार वाउचर आधारित खरीद आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी सरकारी कैशलेस स्वास्थ्य योजनाओं के लिए निर्धारित एसओपी के अनुरूप नहीं थी।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की आडिट टीम ने भी नौ कंपनियों को एक साथ अयोग्य घोषित करने और बाद में उन्हीं कंपनियों के स्टेंट इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए हैं।
विभागाध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, कार्डियोलाजी विभागाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया। इसके बाद मामला रोगी कल्याण समिति की कार्यकारिणी के समक्ष रखा।
28 अप्रैल की बैठक में सभी पात्र बोलीदाताओं की वित्तीय बोलियां खोलने का निर्णय लिया। इसके तहत छह मई को सभी 12 कंपनियों की वित्तीय बोलियां खोली गईं।
एल-1 कंपनी की दरें अमृत फार्मेसी से 74 प्रतिशत तक कम
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि टांडा मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने अब एल-1 (सबसे कम दर वाले) बोलीदाता पर विचार करने का अनुरोध किया है। दस्तावेजों के अनुसार एल-1 कंपनी की दरें अमृत फार्मेसी के माध्यम से खरीदे जा रहे स्टेंट की कीमतों की तुलना में लगभग 74 प्रतिशत तक कम थीं।
प्राचार्य ने सरकार को दोनों की वित्तीय तुलना का ब्योरा भी भेजा है। अब मामले में सरकार के स्तर पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

