हिमखबर डेस्क
मंडी जनपद के पधर क्षेत्र में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे चार नाबालिगों को संयुक्त विभागीय टीम ने रेस्क्यू कर बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की। रेस्क्यू किए गए चारों में दो नाबालिग लड़के और दो नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, टीम के मौके पर पहुंचने पर चारों ने जांच को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन पूछताछ के दौरान मामला स्पष्ट होने पर उन्हें अपने साथ ले जाया गया।
बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत दोनों नाबालिग लड़कों को ओपन शेल्टर होम भेजा गया, जबकि दोनों लड़कियों को अस्थायी रूप से वन स्टॉप सेंटर में रखा गया।
इसके बाद चारों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। समिति के सामने दोनों नाबालिग लड़कियों ने लड़कों के साथ ही रहने की इच्छा जताई और अपने निर्णय पर अडिग रहीं।
मामले की सुनवाई के दौरान बाल कल्याण समिति ने चारों नाबालिगों के अभिभावकों को भी बुलाया और उनकी काउंसिलिंग करवाई।
जांच में यह भी सामने आया कि चारों किशोर-किशोरियां बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ चुके हैं। सभी आवश्यक कानूनी और परामर्श संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद समिति ने चारों नाबालिगों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अलकनंदा हांडा ने अभिभावकों से बच्चों पर नियमित निगरानी रखने, उनकी शिक्षा जारी रखने तथा किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित विभाग से समय पर संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में बच्चों के साथ संवाद और मार्गदर्शन बेहद आवश्यक है।
नगरोटा से बरामद हुई 10वीं की छात्रा
इसी बीच एक अन्य मामले में गागल पुलिस चौकी क्षेत्र की रहने वाली 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा, जो अपने दोस्त के साथ घर से चली गई थी, उसे जिला कांगड़ा के नगरोटा क्षेत्र से बरामद कर लिया गया।
बताया गया कि छात्रा की मां का निधन हो चुका है, जबकि उसके पिता बीमार हैं। छात्रा को भी बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां उसने अपने दोस्त के साथ रहने की इच्छा जताई।
फिलहाल इस मामले में समिति कानूनी प्रावधानों और बाल संरक्षण नियमों के तहत आगे का निर्णय लेगी।

