जब मुझे ही उतना सम्मान नहीं मिला तो मैं दूसरे प्लेयर्स को इस प्रोफैशन के लिए कैसे मोटिवेट करूं : आशीष

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पालमपुर – नवीन शर्मा

ओलिम्पिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद जब मुझे ही सरकार और मेरे विभाग से उतना सम्मान नहीं मिला तो मैं दूसरे खिलाड़ियों को इस गेम के लिए कैसे मोटिवेट कर सकता हूं।

यह बात परौर में राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के शुभारंभ मौके पर पहुंचे मंडी जिले के सुंदरनगर के गांव धनोटू के ओलिम्पिक खिलाड़ी बॉक्सर आशीष चौधरी ने कही।

आशीष ने 2020 में टोक्यो में आयोजित ओलिम्पिक गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया था। आशीष चौधरी वर्तमान में लडभड़ोल में तहसील वैल्फेयर अधिकारी हैं।

हिमाचल में खिलाड़ियों की कमी नहीं

आशीष का कहना है कि हिमाचल में खिलाड़ियों की कमी नहीं है लेकिन उन्हें हरियाणा और पंजाब की तरह सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। हिमाचल में पहले से मैडल आते हैं लेकिन बाकी राज्यों से हम बहुत पीछे हैं। यहां हाई ट्रेनिंग सैंटर तक नहीं है। न ही कहीं इंडोर स्टेडियम है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिलारू में बॉक्सिंग सैंटर को अपग्रेड करने की जरूरत है। अगर यह सैंटर अपग्रेड होता है तो यहां भारत के ही नहीं बल्कि विदेशों के खिलाड़ी भी आएंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में बॉक्सिं खिलाड़ियों के लिए होस्टल भी जरूरी है क्योंकि खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए हरियाणा या पंजाब जाना पड़ता है जिसका खर्चा खिलाड़ी को खुद उठाना पड़ता है।

न कोई प्रमोशन मिली न ही स्पोर्ट्स डिपार्टमैंट में कहीं स्थान

आशीष बताते हैं कि उन्हें विभाग और बॉक्सिंग फैडरेशन की ओर से पूरा सहयोग मिलता है लेकिन उन्हें मलाल है कि ओलिम्पिक में खेलने के बाद भी उन्हें न कोई प्रमोशन मिली न ही स्पोर्ट्स डिपार्टमैंट में कहीं स्थान मिला जबकि उनकी रुचि हिमाचल में स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और उसी क्षेत्र में नौकरी करने की है।

वह बताते हैं कि जिस पोस्ट पर वह अभी हैं वह 2015 में नैशनल गेम्स में मैडल लाने पर मिली थी। उसके बाद ओलिम्पिक, कॉमनवैल्थ, एशियन चैंपियनशिप समेत कई इंटरनैशनल टूर्नामैंट में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर मैडल जीते लेकिन कुछ नहीं मिला।

ओलिम्पिक 2024 के लिए 6 घंटे कर रहे प्रैक्टिस, हरियाणा जाना पड़ रहा

आशीष कॉमनवैल्थ एशियन चैंपियनशिप समेत कई इंटरनैशनल टूर्नामैंट में देश व प्रदेश को अब तक 9 मैडल जीता चुके हैं। 6.2 इंच लबे आशीष इन दिनों रोहतक में ओलिम्पिक 2024 के लिए 6 घंटे प्रैक्टिस कर रहे हैं।

वह बताते हैं कि 12 साल की उम्र में बड़े भाइयों को देखकर ही बॉक्सिंग को चुना था। आशीष के दादा और पिता भगत राम खुद कबड्डी के खिलाड़ी थे। उनके दादा का सपना था कि घर से कोई बच्चा ओलिम्पिक गेम्स में जाए।

आशीष बताते हैं कि उन्हीं के सपनों को साकार कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि घरवालों के साथ बॉक्सिंग फैडरेशन के राजेश भंडारी और सुरेंद्र शांडिल को पूरा सपोर्ट मिल रहा है।

जीत के लिए खुद में जज्बा होना चाहिए 

आशीष ने कहा कि खुद में जज्बा और लक्ष्य हो तो मुकाम जरूर मिलता है। कभी उम्मीद न करें कि दूसरों का किसी तरह का सहयोग मिलेगा। शुरूआत होने की जरूरत है, बाद में बहुत से लोगों का सहयोग मिलता है।

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