कांगड़ा में जमीनों का महाघोटाला, फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे 100 कनाल भूमि के किए गए संदिग्ध सौदे

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हिमखबर डेस्क

कांगड़ा क्षेत्र के इर्द-गिर्द पनपे संदिग्ध भूमि घोटाले का दायरा अब उम्मीद से कहीं अधिक विशाल और चौंकाने वाला निकला है। जांच में इस बात का पर्दाफाश हुआ है कि फर्जी कृषक प्रमाण पत्र के सहारे कांगड़ा शहर और इसके आसपास की सबसे महंगी व प्राइम लोकेशन पर करीब 100 कनाल भूमि की खरीद-फरोख्त की गई है।

जांच एजेंसियों के राडार पर अब तक लगभग 68 जमीनों के सौदे आ चुके हैं, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक अमले में हडक़ंप मचा दिया है। इस बड़े स्कैम पर विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है और राजस्व विभाग को कड़े आदेश जारी किए हैं कि आरोपी परिवार द्वारा किसी भी जमीन की आगे खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण रोक लगाई जाए।

जांच में सामने आया है कि इस सुनियोजित साजिश के तार केवल एक इलाके तक सीमित नहीं थे। आरोपियों ने कांगड़ा शहर के आसपास घुडक़ड़ी, 53 मील, रजियाणा, मटौर, डूंगा बाजार व आसपास के क्षेत्रों में बेशकीमती जमीनों को अपना निशाना बनाया। मूल रूप से जम्मू का रहने वाला यह मुख्य आरोपी परिवार वर्ष 1998 में कांगड़ा आकर बसा था।

इसके बाद इन्होंने हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉम्र्स एक्ट (धारा-118) के सख्त नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्जी एग्रीकल्चर प्रमाण पत्र तैयार करवाए और जमीनों की खरीद-फरोख्त का एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा कर दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मूल रूप से गैर-कृषक होने के बावजूद, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुख्य आरोपी के नाम पर करीब 61.84 कनाल और उसकी पत्नी के नाम पर 44.43 कनाल कृषि भूमि का लेन-देन हुआ।

यह आंकड़ा करीब 100 कनाल से अधिक बैठता है, जिसे 68 अलग-अलग सौदों के जरिए खरीदा और आगे बेचा गया। इस महाघोटाले में तत्कालीन पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और सब-रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है। आरोपियों द्वारा तमलीकनामा, उपहार पत्र और तबादलानामा जैसे दस्तावेजों का दुरुपयोग कर कृषक दर्जा हासिल किया गया।

हैरानी की बात यह है कि बिना वैध स्पेशल या जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के ही जमीनों का पंजीकरण करवा लिया गया और कई सौदों का राजस्व रिकॉर्ड में इद्राज तक नहीं किया गया।

फिलहाल, विजिलेंस ने सारा रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी शुरू कर दी है। संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगने के बाद आरोपी परिवार पर कानूनी शिकंजा कस चुका है। माना जा रहा है कि 68 सौदों की परतें खुलने के बाद कई और चेहरे भी बेनकाब होंगे।

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