कांगड़ा घाटी में अब सुनाई नहीं देगी छुक-छुक की आवाज

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बरसात के चलते पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर रेलवे प्रबंधन ने बंद की सेवाएं, हाल ही में ल्हासे गिरने से फंस गई थीं रेलगाडिय़ां

ब्यूरो – रिपोर्ट

बरसात के चलते जगह-जगह ल्हासे गिरने से पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर यातायात बाधित हुआ, जिसके चलते एक बार फिर से इस रेलमार्ग पर चलने वाली सभी गाडिय़ों को रेल विभाग द्वारा आगामी आदेशों के लिए बंद कर दिया। बरसात के चलते कांगड़ा घाटी में अब दोबारा फिर से कब यह रेलमार्ग बहाल होगा, इस पर अभी कुछ कह नहीं सकते।

बता दें कि कोरोना के चलते पहले लंबे समय तक यह रेलमार्ग बंद रहा था, जबकि कुछ गांवों के लोग रेलगाड़ी पर ही निर्भर हैं, इसके अलावा अन्य कोई भी साधन लोगों के लिए नहीं है। बता दें कि शुक्रवार को भारी बारिश होने से पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर यातायात बाधित हो गया था।

नूरपुर रोड रेलवे स्टेशन से पठानकोट की ओर राजा का बाग के पास रेलमार्ग पर ल्हासे गिरने व चक्की खड्ड में बाढ़ आने से एहतियातन शाम के समय बैजनाथ से पठानकोट की ओर जाने वाली रेलगाडिय़ां नूरपुर, तलाड़ा व जवाली रेलवे स्टेशनों पर रोकनी पड़ गई थीं। एक दिन के बाद इन गाडिय़ों को फिर पठानकोट पहुंचाया गया था।

उधर, स्थानीय लोगों अश्विनी गुलेरिया, ध्यान सिंह, केवल कृष्ण व सुभाष आदि का आरोप है कि हर साल बरसात में पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर जगह-जगह ल्हासे गिरने से रेल यातायात ठप हो जाता है,

जबकि रेल विभाग हर बार दावा करता रहा है कि बरसात रुकते ही रेलमार्ग की आधुनिक तरीके से मुरम्मत कर रेल यातायात बरसात में भी जारी रखा जाएगा, लेकिन अगली बरसात में फिर रेल यातायात बाधित हो जाता है,

जबकि नवभारत एकता दल के राष्ट्रीय संयोजक पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि हर बरसात में रेलमार्ग पर ल्हासे गिरने का सिलसिला 2017 से शुरू हुआ और अब तक जारी है और रेल विभाग हर साल रेललाइन की मुरम्मत करता है।

उन्होंने रेल विभाग से 2017 से अब तक पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर बरसात के बहाने मुरम्मत पर किए गए खर्च पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

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