हिमखबर डेस्क
बहुचर्चित कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार की जद में आने वाले परिवारों के लिए एक अहम खबर है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि परियोजना से प्रभावित शेष सात राजस्व गांवों के लोगों को पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन की राशि जमीन का कब्जा प्रशासन को सौंपने के बाद ही मिलेगी।
पर्यटन विभाग द्वारा जमीन खाली करने के नोटिस जारी होने और सरकार के इस नए निर्देश के बाद लोगों के माथे की चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। प्रशासन को जमीन का कब्जा लेने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इन सात गांवों के प्रभावित परिवारों को उनकी भूमि का मुआवजा पहले ही प्रदान किया जा चुका है।
अब अगली कड़ी में, उन्हें नई जगह बसने के लिए दी जाने वाली आर एंड आर की राशि तभी जारी की जाएगी, जब वे भूमि का कब्जा प्रशासन को सौंप देंगे। प्रभावित परिवारों का तर्क है कि नई जगह जाकर बसने, घर बनाने और नई व्यवस्थाएं जुटाने के लिए आर एंड आर की राशि सबसे अहम है।
उनका सवाल है कि अगर यह राशि जमीन छोडऩे के बाद मिलेगी, तो इस बीच वे अपने परिवारों को लेकर कहां जाएंगे। प्रभावितों ने प्रशासन से इस राशि के मिलने की समयसीमा को लेकर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट करने की मांग की है।
राज्य सरकार कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार को पर्यटन विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को पंख लगाने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण परियोजना मानती है। हालांकि प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन 942 परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित करना है। अब सभी प्रभावितों की नजरें प्रशासन के अगले कदम और आरएंडआर पैकेज पर टिकी हुई हैं।
कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार से कुल 942 परिवार विस्थापित हो रहे हैं, जिनकी जमीन, मकान और अन्य संपत्तियां इस प्रोजेक्ट में आ रही हैं। प्रथम चरण में शामिल सात रेवेन्यू विलेज के प्रभावितों को आर एंड आर की राशि जारी की जा चुकी है। अब दूसरे चरण के बचे हुए सात गांवों पर सरकार का फोकस है, जिसके लिए नई शर्तें सामने आई हैं।

