चंद्रबदनी मंदिर : बंद आंखों से की जाती है मां की पूजा, मनोकामना पूर्ण होने पर त्रिशूल अर्पित करते हैं भक्त

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हिमखबर डेस्क

उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां के पहाड़, नदियां और मंदिर सदियों पुरानी आस्था और रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए हैं। इन्हीं पवित्र स्थलों में एक नाम है चंद्रबदनी देवी मंदिर का।

टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है। मान्यता है कि इस मंदिर में मां की पूजा बंद आंखों से की जाती है। यही वजह है कि चंद्रबदनी धाम को उत्तराखंड के सबसे रहस्यमयी शक्तिपीठों में गिना जाता है।

कहां स्थित है चंद्रबदनी मंदिर

चंद्रबदनी देवी मंदिर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में देवप्रयाग के निकट चंद्रकूट पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2,277 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। यहां से हिमालय की कई पर्वत श्रृंखलाओं के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं, जो इस स्थान की आध्यात्मिक आभा को और बढ़ा देते हैं।

शक्तिपीठ से जुड़ी मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। शिव के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई भाग किए। जहां-जहां माता के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए। मान्यता है कि चंद्रबदनी मंदिर उसी स्थान पर स्थित है, जहां माता सती का धड़ (वक्षस्थल) गिरा था।

बंद आंखों से क्यों की जाती है पूजा

चंद्रबदनी मंदिर की सबसे विशेष और चर्चित परंपरा यहां की पूजा पद्धति है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में स्थापित देवी शक्ति की आराधना करते समय पुजारी अपनी आंखें बंद रखते हैं। माना जाता है कि मां की दिव्य शक्ति के प्रति पूर्ण समर्पण और एकाग्रता के साथ पूजा करने की यह सदियों पुरानी परंपरा है, जिसका आज भी पालन किया जाता है।

यहां नहीं है मां की पारंपरिक प्रतिमा-देश के अधिकांश देवी मंदिरों में जहां मां की प्रतिमा स्थापित होती है, वहीं चंद्रबदनी मंदिर की परंपरा कुछ अलग है। यहां देवी की कोई पारंपरिक मूर्ति नहीं है। मंदिर में स्थापित पवित्र यंत्र और त्रिशूलों को देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर यहां त्रिशूल अर्पित भी करते हैं।

नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़- चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान चंद्रबदनी धाम में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नवरात्रि में यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है और पूरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठता है।

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