काँगड़ा में एक्सपायर्ड नूडल्स बेचना पड़ा भारी! आयोग के फैसले ने दुकानदार की उड़ाई नींद, हर उपभोक्ता जरूर पढ़े

--Advertisement--

हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने के बाद एक दुकानदार को 440 वोल्ट का झटका लगा है। आयोग ने न केवल दुकानदार पर मोटा जुर्माना लगाया है बल्कि उसको भारतीय कानून भी समझा दिया है। आयोग का यह आदेश उन सभी दुकानदारों के लिए भी नजीर है जो हर गलती को उपभोक्ताओं के माथे मढ़ देते हैं और खुद जिम्मेदारियों से बच निकलते हैं।

मामला कांगड़ा जिले का है जहां एक उपभोक्ता आयोग ने एक्सपायर्ड इंस्टेंट नूडल्स बेचने के मामले में एक रिटेलर को सजा सुनाई है।आयोग ने दुकानदार को उपभोक्ता को नूडल्स की पूरी कीमत लौटाने का आदेश तो दिया ही है साथ ही उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 15,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी का खर्च भी देने को कहा है। यह फैसला 6 जुलाई 2026 को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया।

बता दें कि भवर्णा इलाके में शिकायतकर्ता जुगल किशोर ने 26 फरवरी 2026 को एक लोकल दुकान से स्पाइसी कोरियन इंस्टेंट नूडल्स का पैकेट खरीदा। वह उसे घर लेकर गए और पकाकर अपनी बेटी को खिलाया लेकिन कुछ देर के बाद ही बच्ची को उल्टियां होने लगी और उसकी तबीयत बिगड़ गई।

टाइम्‍स ऑफ इंड‍िया की खबर के मुताब‍िक बेटी को अस्पताल ले जाने के बाद उन्होंने नूडल्स का पैकेट चेक किया तो पता चला कि नूडल्स एक्सपायर्ड थे। ये नवंबर 2025 में ही तीन महीने पहले एक्सपायर हो चुके थे। आखिरकार जुगल किशोर ने कंज्यूमर कमीशन में याचिका दायर कर दी। याचिका में उन्होंने दुकानदार पर एक्सपायर्ड प्रोडक्ट बेचकर उनके परिवार की सेहत को खतरे में डालने के लिए कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान दुकानदार ने भी बचाव में दलीलें दीं, लेकिन आयोग ने दुकानदार को भी भारतीय कानून पूरी तरह समझा दिया। आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की बैंच ने कहा कि “Caveat Emptor” यानि खरीदार सावधान रहे का सिद्धांत आधुनिक भारतीय कानून में लागू नहीं होता।

खासकर खाद्य पदार्थों और जन स्वास्थ्य के मामले में भारत में “Caveat Venditor” यानि विक्रेता सावधान रहे का सिद्धांत लागू होता है। इसलिए इस मामले में भी गलती विक्रेता की थी न कि उपभोक्ता की। आयोग ने आगे कहा कि रोजाना की खरीदारी में ग्राहक से हर सामान की एक्सपायरी चेक करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसकी जिम्मेदारी दुकानदार की है कि वह कोई भी एक्सपायर्ड आयटम न बेचे और एक्सपायर्ड स्टॉक को समय पर क्लियर करे। अगर कोई दुकानदार ये नोटिस भी लगा देता है कि एक्सपायरी डेट खुद जांच लें तो यह भी उसके बचाव का आधार नहीं हो सकता।

आयोग ने दुकानदार की उन दलीलों को भी कमतर जाना जिनमें कहा गया था कि उस व्यक्ति ने बच्चे का मेडिकल सबूत नहीं लगाया।आयोग ने कहा कि इतनी छोटी राशि के लिए कोई पिता अपनी बच्ची की बीमारी का झूठा दावा नहीं करेगा। आयोग ने इसे Consumer Protection Act, 2019 के तहत उपभोक्ता के सुरक्षा अधिकार का सीधा उल्लंघन माना।

अब आयोग ने दुकानदार को 30 दिनों के अंदर नूडल्स की पूरी कीमत वापस करने, 15,000 रुपये मुआवजे और 5,000 रुपये खर्च देने का आदेश दिया है। ऐसे में देशभर के सभी उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला जानना जरूरी है, ताकि ऐसे किसी भी मामले में सख्त कदम उठाया जा सके और कोई दुकानदार ऐसी गलती न करे।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

गगल के 70 परिवारों को मुआवजे के साथ मिलेगा आरएंडआर का लाभ: केवल सिंह पठानियां

कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित परिवारों को उनका हक...

हिमाचल में पहाड़ी दरकने से बड़ा हादसा, JCB ऑपरेटर की मौत; हेल्पर गंभीर

हिमाचल में पहाड़ी दरकने से JCB ऑपरेटर और हेल्पर...

हिमाचल के लिए गर्व का पल! दिल्ली में मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, शिमला के इन अफसरों ने भी गाड़े झंडे

हिमाचल प्रदेश के पुलिस और होमगार्ड कर्मियों को राष्ट्रीय...