अभिमान देवताओं का भी पतन कर देता है तो मनुष्यों की औकात क्या है

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ज्वाली- अनिल छांगू

ज्वाली उपमंडल के टियूकरी गांव में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण के सातवें दिन में कथा व्यास आचार्य सुमित भारद्वाज ने कथा श्रवण करते हुए बताया कि देवराज इंद्र ने अभिमान किया कि मैं देवताओं में श्रेष्ठ हूं। भगवान ने देवराज इंद्र के अभिमान को तुड़वाने के लिए गोवर्धन पर्वत का पूजन करवाया और ब्रज वासियों से गोवर्धन पुजवा दिए।

यह बात जब देवराज इंद्र को पता चली तो देवराज इंद्र ने क्रोध किया और सम्बर्तक मेघो को आज्ञा दी कि आप ब्रजमंडल में इतना जल बरसाओ कि सारा ब्रजमंडल जल में डूब जाए। मेघों ने 7 दिनों तक खूब जल बरसाया लेकिन भगवान ने सुदर्शन चक्र से संपूर्ण जल को सुखा दिया और फिर जब देवराज इंद्र देखने के लिए आए हैं तो देवराज इंद्र बहुत लज्जित हुए और चरणों में गिर पड़े और क्षमा मांगी । प्रभु मुझ में अभिमान आ गया था। इस कारण आपने मेरा अभिमान चूर चूर किया। यह अभिमान देवताओं का भी पतन कर देता है, तो वह मनुष्यों की औकात क्या है ।

इस मौके पर प्रवक्ता सुभाष शास्त्री, कमेटी प्रधान कमला पठानिया,उपप्रधान दया रानी,पुष्पा देवी,उर्मिला देवी,निर्मला देवी, पुष्पा कुमारी, शशि वाला,कमलेश कुमारी, नीति नारियल, रक्षा जरियाल,सुदेश कुमारी, आदि मौजूद रहे।

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