हिमाचल में दिव्यांग बच्चों को बेहतर उपचार और थेरेपी की सुविधा देने के लिए ‘Therapy on Wheels’ सेवा शुरू की जाएगी। मंडी, शिमला और कांगड़ा में बच्चों को मोबाइल थेरेपी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश के दिव्यांग बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण थैरेपी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। समग्र शिक्षा अभियान, हिमाचल प्रदेश और सांफिया फाउंडेशन के बीच दिव्यांग बच्चों के लिए थैरेपी सेवाओं का विस्तार करने को लेकर समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
शिमला स्थित समग्र शिक्षा के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुए इस समझौते पर समग्र शिक्षा की ओर से स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजेश शर्मा और सांफिया फाउंडेशन की ओर से फाउंडर एवं निदेशक डॉ. श्रुति भारद्वाज ने हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी के तहत अब मंडी, शिमला और कांगड़ा जिलों में ‘Therapy on Wheels’ के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को उनके नजदीकी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की थैरेपी सेवाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। मोबाइल थैरेपी वैन के जरिए बच्चों तक सेवाएं पहुंचने से उन परिवारों को विशेष राहत मिलेगी, जिन्हें दूर-दराज के थैरेपी केंद्रों तक आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एक वर्ष के लिए शुरू होगी परियोजना
समग्र शिक्षा के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजेश शर्मा ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को आवश्यक थैरेपी सेवाओं से जोड़ना और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा और सांफिया फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से तीन जिलों में बच्चों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में यह परियोजना एक वर्ष के लिए संचालित की जाएगी। इस दौरान प्राप्त अनुभव, परिणामों और जरूरतों का आकलन करने के बाद भविष्य में इन सेवाओं को अन्य क्षेत्रों तक भी विस्तार देने पर विचार किया जा सकता है।
दूरदराज के बच्चों तक पहुंचेगी थैरेपी
सांफिया फाउंडेशन की फाउंडर एवं निदेशक डॉ. श्रुति भारद्वाज ने कहा कि सरकार के साथ इस तरह की साझेदारी फाउंडेशन के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि सांफिया फाउंडेशन लंबे समय से दिव्यांग बच्चों को थैरेपी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘Therapy on Wheels’ के माध्यम से ऐसे बच्चों तक पहुंचना आसान होगा, जो भौगोलिक दूरी, परिवहन की समस्या या अन्य कारणों से नियमित रूप से थैरेपी केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। सरकार के साथ हुए MOU से इन प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
अभिभावकों को भी मिलेगा मार्गदर्शन
‘Therapy on Wheels’ के माध्यम से बच्चों की आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न थैरेपी सेवाएं उपलब्ध करवाने के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी जरूरी मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल थैरेपी उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि बच्चों के विकास, कार्यात्मक क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
मंडी, शिमला और कांगड़ा से होगी शुरुआत
MOU पर हस्ताक्षर के बाद अब मंडी, शिमला और कांगड़ा जिलों में ‘Therapy on Wheels’ के संचालन की दिशा में कार्य शुरू किया जाएगा। यह पहल हिमाचल प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को सुलभ, नजदीकी और जरूरत के अनुसार थैरेपी सेवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ये रहे उपस्तिथ
कार्यक्रम में प्रतिभा बाली, राज्य समन्वयक, समग्र शिक्षा तथा बीजू हिमदल, कार्यक्रम प्रबंधक, सांफिया फाउंडेशन भी मौजूद रहे।

