तेज बहाव के बीच जान जोखिम में डालकर पुल पार करने की मजबूरी… वर्षों से अधूरे पड़े पुल के निर्माण का इंतजार… और हर गुजरता दिन ग्रामीणों के लिए किसी खतरे से कम नहीं।
चम्बा – भूषण गुरुंग
जनजातीय क्षेत्र भरमौर की ग्राम पंचायत बडग्रां के पलाणी पुल से सामने आया एक वीडियो जिसमें प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और ग्रामीणों की मजबूरी, दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।
भरमौर की ग्राम पंचायत बडग्रां के पलाणी पुल की हैं… जहां ग्रामीणों को अपनी जान हथेली पर रखकर अधूरे बन रहे लोहे के पुल को पार करना पड़ रहा है। एक तरफ नीचे सैकड़ों फीट गहराई में उफनता नाला… दूसरी तरफ अधूरा पुल… और इनके बीच अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों की मजबूरी।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह स्थानीय लोग जोखिम भरे इस रास्ते से गुजर रहे हैं। जरा सी चूक और किसी को भी मौत अपने आगोश में ले सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि पलाणी पुल उनके लिए महज एक रास्ता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत है। पुल का निर्माण पूरा होने की उम्मीद में वर्षों बीत गए, लेकिन निर्माण कार्य की रफ्तार आज भी सवालों के घेरे में है।
पुल के निर्माण को लेकर ग्रामीण पहले भी कई बार अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं और आंदोलन तक कर चुके हैं। बावजूद इसके, समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
वहीं, एक स्थानीय युवा ने मौके की इन तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया के माध्यम से सामने रखा है। वीडियो के जरिए उसने यह दिखाने की कोशिश की है कि 21वीं सदी में भी पहाड़ के ग्रामीण किस तरह मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
सवाल अब यही है कि आखिर ग्रामीणों की इस जानलेवा मजबूरी का समाधान कब होगा? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन और संबंधित विभाग की नींद टूटेगी, या उससे पहले अधूरे पड़े पलाणी पुल का निर्माण पूरा कर ग्रामीणों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा?

