किन्नौर में भारत-चीन सीमा पर ड्रैगन ने तेज की गतिविधियां, सुरंग निर्माण की भी आशंका

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रिकांगपिओ – एस पी क्यूलो मथास

अपने विस्तारवादी नीति को लेकर बदनाम चीन सरकार की एक और नापाक हारकर किन्नौर के साथ लगते भारत-चीन अंतराष्ट्रीय सीमांत क्षेत्र में सामने आया है।

बता दें कि किन्नौर जिले का एक बड़ा भू-भाग भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ लगता है। कुछ ही वर्ष पूर्व यह बात सामने आई थी कि भारत-चीन अंतराष्ट्रीय सीमा के साथ लगते चीन अधिकृत क्षेत्र में चीन सरकार तेजी से सडक़ का निर्माण कर रहा है।

चीन सरकार ने अब तिब्बत के तागो, सारंग, पेगर, छुसे, कावरा, री व गंग आदि सात गांव में सडक़ों के निर्माण के साथ अन्य गतिविधियां भी तेज कर दी है।

साक्ष्यों के साथ अब यह बात भी सामने आ रही है कि चीन उसी क्षेत्र में सडक़ निर्माण के बाद विधुत आपूर्ति भी पहुंचा चुका है। प्रदेश कांग्रेस सचिव सत्यजीत नेगी ने तो ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में चीनी सरकार द्वारा गुप चुप तरीके से सुरंग निर्माण करने का भी अंदेशा जताया है।

उन्होंने बताया कि यदि जिस तरह चीन सरकार अपने सीमावर्ती क्षेत्र में सडक़ निर्माण के बाद कई अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।

उसी तर्ज पर भारत सरकार को भी बॉर्डर क्षेत्र खेमकुला व सिमडालींग आदि क्षेत्रों में भी हमारे देश के जरूरत मंद लोगों के गांव बसा देना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को भूमि मिलने के साथ साथ सीमाओं पर अन्य देश की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।

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