सवर्ण व SC प्रधानों ने मिलकर लौटाई 4 मासूम बच्चों को माता-पिता की गोद

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जनपद के सराहां उपमंडल में दो पंचायत प्रधानों ने मिलकर एक शानदार प्रेरणा दायक इबारत लिखी है। सवर्ण जाति से ताल्लुक रखने वाली महिला प्रधान प्रेरणा बनी है। साथ ही अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले प्रधान हेमराज राज कश्यप की भूमिका भी प्रशंसनीय रही है।

प्रधानों की कोशिश से चार मासूम बच्चों को माता-पिता की गोद तो नसीब हो ही गई साथ ही दृष्टिहीन बुजुर्ग महिला को भी अपनों का आसरा मिला है। गरीब परिवार की यह दास्तां धार टिकरी व कोटला पंजोहला पंचायतों से जुड़ी है। हालात ऐसे पैदा हुए कि डेढ़ साल के मासूम सहित 11, 7 व  3 साल के बच्चे माता-पिता से दूर हो गए।

11 साल की बहन को डेढ़ साल के भाई को संभालने के लिए “माँ” का किरदार भी निभाना पड़ रहा था। बच्चो की बूढ़ी नानी आंखों से नहीं देख पाती है। लिहाजा पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली 11 साल की बेटी ने तीन छोटे बहन भाइयों सहित बुजुर्ग नानी की जिम्मेदारी उठाई हुई थी।

वीरवार को धार टिकरी पंचायत की प्रधान अरुणा ठाकुर को जब बच्चों की हालात का पता चला तो वो उपप्रधान संजीव ठाकुर, पूर्व उप प्रधान पूर्ण ठाकुर के साथ जडहेनुआ गांव पहुंची। वो यह देखकर हैरान हो गई कि बच्चों के पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं थे। विश्वास करना कठिन होगा, लेकिन पंचायत प्रधान की माने तो मासूम बच्चे मिट्टी तक खाने पर विवश हो रहे थे। पहले तो पंचायत प्रधान ने बच्चों के लिए राशन व खाने-पीने की व्यवस्था की।

खंगालने पर पता चला कि बच्चों की मां रेणुका विधानसभा क्षेत्र के कोटीधीमान में पिता के पास चली गई है। पिता की तलाश की गई तो वह कोटला पंजोहला पंचायत में अपने घर में रह रहा था। धार टिकरी पंचायत की प्रधान ने यह मामला कोटला पंजोहला पंचायत के प्रधान हेमराज कश्यप से उठाया।

पंचायत प्रधानों ने मिलकर यह प्रयास शुरू किया कि बच्चों को माता-पिता से मिलाया जाए। वीरवार को गांव से बच्चों को पिता प्रेमचंद के घर भेज तो दिया गया, लेकिन पिता ने जमकर शराब का सेवन किया हुआ था। बच्चे फिर बेबस हो गए। इसके बाद पंचायत प्रधान हेमराज ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए चारों बच्चों की जिम्मेदारी को उठा लिया। डेढ़ साल के मासूम को पड़ोस में सुरक्षित घर पर भेजा गया, जबकि 3 बच्चों को प्रधान हेमराज कश्यप ने अपने घर में आश्रय दिया।

मामला वीरवार को ही सराहां पुलिस तक भी पहुंच गया था। पुलिस ने बच्चों के माता-पिता को तलब किया। बताते हैं कि गुरबत की वजह से मां के पास कोटी धीमान से सराहां थाना तक आने के लिए किराया तक नहीं था। पंचायत प्रधानों ने गूगल पे के जरिए सीता देवी को किराए की राशि भेजी।

ऐसे आया वो पल

शुक्रवार को वह पल आया जब चारों बच्चे पंचायत प्रधानों की मौजूदगी में थाना पहुंचे। पिता प्रेम चंद व माँ सीता देवी भी पहुंच गए। पिता प्रेमचंद ने इस बात का आश्वासन दिया कि वह शराब नहीं पिएगा, साथ ही बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी को  भी उठाएगा। सीता देवी भी पति के साथ रहने को तैयार हो गई।

उधर बच्चों की अंधी नानी को भी उनके भाइयों के हवाले कर दिया गया ताकि उनका बुढ़ापा भी सुकून से गुजरे। कुल मिलाकर पंचायत प्रधानों की कोशिश रंग लाई है, माता-पिता का साया बच्चों को नसीब हो गया है। पुलिस थाना में प्रधान अरुणा ठाकुर व हेमराज कश्यप भी मौजूद थे।

हर काम में माहिर 11 साल की बेटी….

पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली 11 साल की बेटी हर काम में माहिर है। स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ छोटे बहन व भाइयों की जिम्मेदारी तो उठा ही रही थी साथ ही बूढ़ी नानी की भी लाठी बन गई थी, लेकिन घर में राशन न होने के कारण हर वक्त उसे भोजन की चिंता सताती रहती थी।

यह भी आया सामने….

असल में गरीब मां निर्मोही नहीं थी। पति को शराब की आदत थी। वो अपने घर में रह रहा था। अंधी माँ के पास रहने के दौरान उसे एक व्यक्ति अक्सर धमकाया करता था, लिहाजा वो बच्चो को छोड़कर चली गई थी।

कोटला पंजोहला पंचायत के प्रधान हेमराज ने बातचीत में कहा कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए जल्द ही परिवार के लिए अटल आवास योजना के तहत राशि मंजूर करवाई जाएगी। साथ ही वो अपने स्तर पर एक लाख रूपये एकत्रित करेंगे ताकि बच्चों के लिए घर बन सके।

यह बोली अरुणा ठाकुर’

धार टिकरी पंचायत की प्रधान अरुण ठाकुर ने कहा कि यह बेहद ही खुशी की बात है कि मासूम बच्चों को माता-पिता का साया नसीब हो गया है, जबकि बुजुर्ग महिला को भी अपने मिल गए हैं। उन्होंने कहा कि इंसानियत के नाते हर शख्स को एक दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उनका कहना था कि जब वो बच्चों को देखने पहुंची थी तो दृश्य बेहद ही मार्मिक था। बता दे कि इस नेक कार्य में महिला प्रधान को पति धर्म सिंह का भी सहयोग मिला।

अनुसूचित जाति से है बच्चे 

चारों बच्चों का ताल्लुक अनुसूचित जाति से है। विडंबना यह है कि सरकार की योजनाएं धरातल पर ऐसे बच्चों तक नहीं पहुंच पाती है। उम्मीद है कि इन बच्चों का भविष्य सुनहरा होगा।

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