पौंग विस्थापित समिति की प्रदेश स्तरीय बैठक में विस्थापितों का छलका दर्द, 60 साल से न्याय के लिए खा रहे दर-दर की ठोंकरे

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व्यूरो रिपोर्ट

पौंग डैम विस्थापित समिति हिमाचल प्रदेश की एक महत्त्वपूर्ण बैठक प्रधान हंसराज चौधरी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस मौके पर पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही राजस्थान में पौंग विस्थापितों को पेश आ रही समस्याओं को भी गहराई से सुना ।

अरबों रुपए की आमदनी देने वाला पौंग डैम विस्थापितों को समस्याओं के अलावा कुछ नहीं दे सका । विस्थापितों की समस्याएं पिछले 60 वर्षों से लंबित पड़ी हुई है, इसमें 1996 में माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले की भी राजस्थान सरकार ने खुलेआम अवहेलना की है।

हिमाचल व राजस्थान सरकार के बीच हुए समझौते को भी हिमाचल सरकार लागू करवाने में असमर्थ रही है, जिसका परिणाम आज 60 वर्ष बीत जाने के बाद भी पौंग बांध विस्थापित दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं तथा उनके मुरब्बे आज भी झूठे इकरारनामे बना कर राजस्थान में भू माफिया धड़ल्ले से बेच रहे हैं। इसके लिए न तो हिमाचल सरकार न ही राजस्थान सरकार कोई ठोस कदम उठा पाई है।

इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार 1188 मुरब्बे पौंग बांध विस्थापितों को आरक्षित किए गए थे तथा विस्थापितों को अलाटमेंट हेतु आदेश दिया गया था और हाईकोर्ट के आदेशों अनुसार उन मुरब्बों का पानी काटने के बावजूद भी राजस्थान भू-माफिया की राजस्थान सरकार से कथित सांठगांठ के चलते अवैध रूप से पानी की सिंचाई कर बिजाई कर करोड़ों रुपए की फसल उगा कर हर वर्ष बेच रहा है। ।

इस मौके पर परामर्श व सहायता हेतु ज्वाली से चौधरी मुल्क राज, विशंभर सिंह तथा प्यारेलाल, राजा का तालाब से नंदकिशोर, शादीलाल व अजय, जसूर से रविंद्र व एमएल कौंडल, गंगथ से संजीव व शशि पाल, शाहपुर से राम लोक शर्मा, कांगड़ा से हंसराज व कुलदीप शर्मा, भटोली फकोरियां से सतीश कुमार शर्मा को पौंग बांध विस्थापितों की सहायता के लिए नियुक्त किया है । जो पौंग बांध विस्थापित राजस्थान में भू-माफिया से धोखाधड़ी से शिकार हो चुके हैं वह केस लगाना चाहते हैं, तो इन लोगों से संपर्क कर सकते हैं।

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