रिपन में खंड चिकित्सा अधिकारियों के लिए अंगदान का जागरूकता सत्र आयोजित

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जिले भर में अंगदान के प्रति जागरूक होंगे लोग, बीएमओ अपने ब्लॉक में लोगों को बताएंगे अंगदान की महता

शिमला – जसपाल ठाकुर

शिमला के रिपन अस्पताल के कॉन्फ्रेंस हॉल में बुधवार को सोटो (स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) हिमाचल प्रदेश की ओर से जिला के सभी खंड चिकित्सा अधिकारी बीएमओ के लिए अंगदान के प्रति जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।

इसमें सोटो के नोडल अधिकारी डॉ पुनीत महाजन ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सभी बीएमओ ( खंड चिकित्सा अधिकारी) से अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सोटो प्रदेश भर में जागरूकता शिविर आयोजित कर आम लोगों को अंगदान के संदर्भ में जानकारी उपलब्ध करवा रहा है और इसे लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के आइजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान की सुविधा उपलब्ध है। आईजीएमसी शिमला में लाइव किडनी ट्रांसप्लांट की भी सुविधा उपलब्ध है जहां मौजूदा समय तक 5 लाइव किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।

वहीं सोटो के स्थापित होने के बाद अब मरणोंपरांत यानि ब्रेन डेड होने के बाद कैडवर ऑर्गन रिट्रीवल व ट्रांस्पलांट की सुविधा शुरू हो रही है। यह गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में लोगों को अंगदान के बारे में जागरूकता का अभाव है।

इस अभाव के कारण देशभर में करीब 4 लाख लोग अंग न मिलने के कारण जान गंवा देते हैं। बदलती जीवन शैली के चलते ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय की बीमारी, ब्रेन स्ट्रोक व फेफड़े की बीमारियां बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से किडनी हॉर्ट और लीवर बड़ी संख्या में फेल हो रहे हैं।

इन गंभीर बीमारियाें का स्थायी ईलाज केवल आॅर्गन ट्रांस्पलांट से संभव है। ऐसे में समय रहते अगर मरीजों को किसी ब्रेन डेड मरीज के अंग मिल जाएं तो उन्हें जीवनदान मिल सकता है। उन्होंने बताया कि सिर पर गंभीर चोट लगने, ब्रेन हैमरेज व ब्रेन स्ट्राेक के कारण अगर व्यक्ति ब्रेन डेड होता है तभी वह अंगदान करने के योग्य बनता है।

एक व्यक्ति मरने के बाद आठ लोगों को जीवनदान दे सकता है। वहीं जीवित अंगदाता जरूरत पड़ने पर नजदीकी रिश्तेदारों को अपने किडनी, लीवर का भाग और बोन मैरो दान दे सकते हैं। ब्रेन डेड किडनी, हार्ट, लीवर, पैनक्रियाज, फेफड़े, कॉर्निया और त्वचा दान कर सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति किन्हीं कारणों से ब्रेन डेड होता है तो अस्पताल में मरीज को निगरानी में रखा जाता है और विशेष कमेटी विभिन्न प्रकार की जांचों के बाद मरीज को ब्रेन डेड घोषित करती है।

मृतक के अंग लेने के लिए पारिवारिक जनों की सहमति बेहद जरूरी रहती है। सीएमओ डॉ सुरेखा चोपड़ा ने कहा कि जिले भर में बीएमओ के माध्यम से लोगों को अंगदान करने व इससे संबंधित सुविधाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।

जागरूकता सत्र के दौरान सोटो की स्टीरिंग कमेटी के सदस्य व रिजनल डायरेक्टर हेल्थ एंड फेमिली वेल्फेयर शिमला डॉ अभिशेख कपूर, सोटो की आइईसी कंसल्टेंट रामेश्वरी, ट्रांस्पलांट कॉर्डिनेटर नरेश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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