
न बना अस्थि विसर्जन घाट और न ही स्नानागार
व्यूरो रिपोर्ट
उपमंडल जवाली के अधीन पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान निर्मित मिनी हरिद्वार जवाली सरकारों-मंत्रियों व विधायकों की अनदेखी के चलते आज भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया है। मिनी हरिद्वार जवाली को विकसित करने की कांग्रेस व भाजपा सरकार के मंत्री-विधायकों द्वारा घोषणा तो की गई लेकिन घोषणाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया गया।
विकासरूपी मानचित्र पर मिनी हरिद्वार जवाली विकसित नहीं हो पाया है, जिससे लोगों में भाजपा-कांग्रेस के प्रति रोष व्याप्त है। मिनी हरिद्वार जवाली में जिला स्तरीय बैसाखी मेला भी आयोजित होता है तथा इसके अलावा विशेष पर्वों को लोग मिनी हरिद्वार जवाली में स्नान करने को आते हैं, परंतु मिनी हरिद्वार जवाली में रात्रि विश्राम के लिए कोई प्रावधान नहीं है और न ही नहाने के लिए स्नानागार हैं।
मिनी हरिद्वार जवाली में लोग अस्थियों का विसर्जन करने वहीं पहुंचते हैं, लेकिन अस्थि विसर्जन घाट नहीं होने से यहां-वहां ही अस्थियों का विसर्जन करते हैं। मिनी हरिद्वार में कोई भी जलाशय निर्मित नहीं करवाया गया है, ताकि उसमें नहाया जा सके। मौजूदा समय में विधायक अर्जुन सिंह ने भी अभी तक इस तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया है।
बुद्धजीवियों ने कहा कि पांडवों द्वारा निर्मित मिनी हरिद्वार को पर्यटन रूपी मानचित्र पर विकसित किया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें व पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
पूर्व प्रधान रवि कुमार ने कहा कि मिनी हरिद्वार जवाली को पर्यटन की दृष्टि से विकसित जाना समय की मांग है। जब मैं प्रधान था तो मिनी हरिद्वार में स्नानागार व श्मशानघाट बनवाया गया था। मिनी हरिद्वार जवाली में स्नानागार बनाए जाने चाहिए।
