फोरलेन के लिए अधिग्रहण की गई भूमि का कम मुआवजा मिलने पर ग्रामीणों में रोष

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काँगड़ा- राजीव जस्वाल

शिमला-मटौर फोरलेन सड़क के लिए अधिग्रहण की गई भूमि का कम मुआवजा मिलने पर रानीताल, मोहाल, कौठार, रसूह, तकीपुर, भंगवार गांव के ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है। फोरलेन प्रभावित ग्रामीण रानीताल में इकठ्ठा हुए और शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर फोरलेन सड़क बनाने को लेकर अधिग्रहण की हुई भूमि का मुआवजा राशि काफी न होने को लेकर रोष प्रकट किया।

इस दौरान ग्रामीणों ने फोरलेन प्रभावितों को दिए जाने वाले मुआबजे को लेकर कहा कि मौजूदा समय में कांगड़ा जिले में जो भी हाई लेवल रेट हैं उसी के हिसाब से हमें मुआवजा दिया जाए। इकठ्ठा हुए ग्रामीणों ने कहा कि शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर फोरलेन निर्माण कार्य में जो भी जमीन, मकान या दुकान आए उनका अधिग्रहण किया जा रहा है।

परंतु फोरलेन सड़क की मुआवजा राशि बहुत ही कम है इतने कम मुआवजा की राशि से ग्रामीणों को कहीं और जमीन भी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज के हिसाब इन जमीनों के रेट सरकारी रेट से 4 से 5 गुना ज्यादा हैं पर बावजूद इसके सरकार ग्रामीणों के जमीन का मुआवजा पता नहीं किस आधार पर तय कर लगा रही है।

मकान और दुकान का एक मीटर जाने पर मिले पूरी बिल्डिंग का मुआवजा

मौके पर इकठ्ठा हुए ग्रामीणों ने कहा कि मकान और दुकानों की मुआवजा राशि भी बहुत ही कम है। जितना मकान का मुआवजा मिल रहा है, उस राशि से फिर से घर बनाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर मकान और दुकानों का एक मीटर हिस्सा भी फोरलेन के निर्माण कार्य के दायरे में आ रहे हैं तो प्रभावितों को पूरी बिल्डिंग का मुआवजा मिलना चाहिए।

इकठ्ठा हुए फोरलेन प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार तथा प्रसाशन से उचित मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है। इस मौके पर मेहर सिंह राणा, ओंकार सिंह, प्रेम लाल, अमन कौशल, राम सिंह पठानिया, विकास जरियाल, क्रांति शर्मा, दीपक गुलेरिया आदि ग्रामीण मौजूद थे।

 

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