क्षेत्रीय समीकरण: महगाई व अंतर्कलह कहीं बिगाड़ ना दे भाजपा की गेम

--Advertisement--

Image

मंहगाई व अंतर्कलह कहीं बिगाड़ ना दे भाजपा की गेम, पर पुराने कार्यकर्ता दिक्कत खड़ी कर सकते हैं कांग्रेस को।

फतेहपुर, अनिल शर्मा

जैसे जैसे चुनाब नजदीक आते दिख रहे हैं बैसे ही पार्टियों की अंतर्कलह उभरकर सामने आने शुरू हो गई है। नेता या मंत्री चाहे जितना भी छुपाने की कोशिश कर लें लेकिन ये पब्लिक है ये सब जानती है।

ऐसे ही हाल अब अर्की तथा फतेहपुर में भी दिखते नजर आ रहे हैं। एक तरफ राजा वीरभद्र सिंह की मृत्यु के बाद कांग्रेस को संगठित करना पार्टी हाई कमान के लिए टेडी खीर लग रही है। तो दूसरी ओर उपचुनाबों में जीत दर्ज करना भी कोई आसान नहीं है।

अगर फतेहपुर की बात करें तो कांग्रेस में एक तरफ परिवारवाद का मुद्दा तो दूसरी ओर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी। कहीं ना कहीं पार्टी को नुकसान दे सकती है ।

तो वहीं अगर ससक्क्त उम्मीदवारों में टिकट के चहवानों की बात करें तो मैदान में कुछ टिकट के चाहवान ऐसे हैं , जिनका क्षेत्र की जनता में एक अच्छी पकड़ है। तो कुछ एक टिकट की चाहत तो रखते हैं परन्तु ग्राउंड स्तर पर बहुत कमजोर दिख रहे हैं। या यूं कहिए कि ग्राउंड स्तर पर जीरो हैं ।

लेकिन अभी तो समय है अभी तो उनके पास मौका होगा वे अपना शक्ति प्रदर्शन करने का,जिसमें पता चलेगा कि किस में कितना दम है।

वहीं अगर बात भाजपा की बात करें तो पार्टी अपने स्तर पर अंतर्कलह को दूर करने की कोशिश तो कर रही है पर कार्यकर्ताओं में एक दूसरे के प्रति नफरत का गुबार आखिर निकल ही आ रहा है ।

बता दें कि पिछले कुछ दिन पहले भाजपा के एक मंत्री ने रैहन के पास एक कार्यक्रम किया और उसमें भाजपा समर्थित एक पंचायत प्रधान ने एक भाजपा नेता के खिलाफ कुछ ऐसी टिप्पणी की कि मंत्री साहिब को मीडिया के समक्ष सफाई देनी पड़ी कि कार्यक्रम में भाजपा मंडल व प्रमुख नेता को तो बुलाया था परंतु वे जरूरी काम के चलते नहीं आ पाए ।

यहां प्रश्न यह उठता है कि अगर मंत्री साहिब ने सफाई देते बताया कि भाजपा के उस प्रमुख स्थानीय नेता को कोई जरूरी काम था तो क्या भाजपा मंडल को बुलाना जरूरी ना था? जब मण्डल अध्यक्ष से बात हुई तो उन्होंने साफ साफ शब्दों में कह दिया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई थी ।

वता दें कि यहां कार्यक्रम चल रहा था वहां से भाजपा मण्डल अध्यक्ष का घर करीब 1 से 2 किलोमीटर है जबकि उस कार्यक्रम में भाजपा के 10 से 15 किलोमीटर दूर तक के कार्यकर्ता भी आए थे। अगर यह अंतर्कलह को इशारा नही कर रहा तो ओर क्या है बैसे भी इस बार भाजपा को और भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

बता दें कि भाजपा चाहे जो भी हथकंडे अपना ले लेकिन उन्हें महंगाई या वेरोजगारी जैसे मुद्दों से निपटना आसान नहीं रहेगा।वहीं अगर आजाद प्रतियाशी या भाजपा से किनारा कर चुके नेताओं की बात करें तो वे भी भाजपा के रास्ते का कांटा जरूर बनेंगें।

चुनाबी परिणाम जो भी हों लेकिन सभी पार्टियों को अपने अंदर की अंतर्कलह दूर करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

घायल तड़पता रहा, परिजन गिड़गिड़ाते रहे, कांगड़ा जिला में खुल गई सरकारी अस्पताल की पोल, वीडियो वायरल

हिमखबर डेस्क  कांगड़ा के धरोहर गांव गरली स्थित सिविल अस्पताल...

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बिना नाम लिए PM पर साधा निशाना, सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

हिमखबर डेस्क  इजरायल-अमेरिका व ईरान के मध्य युद्ध के बीच...