हवा से ताश की पत्तों की तरह बिखर कर नदी में समा गया पुल, PWD की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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मंडी, नरेश कुमार

प्रदेश सरकार भले ही सड़क और पुल निर्माण में क्वालिटी वर्क के लाख दावे कर रही हो लेकिन पीडब्ल्यूडी ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहां शुक्रवार को सतलुज नदी पर 19 लाख की लागत से तैयार हो रहा चाबा-शाकरा पुल हवा के तेज झोकों से ताश की पत्तों की तरह बिखर कर नदी में समा गया।

लोक निर्माण विभाग के सब डिवीजन सुन्नी के तहत सतलुज नदी पर निर्माणाधीन ये पुल हवा की तेज रफ्तार से कुछ सैकेंड तक झूलता रहा और फिर देखते ही देखते पुल के एक हिस्से में लगे लोहे के वीम और चैनल टूटकर नदी में समा गए, जिसके बाद पुल में उपयोग में लाई जा रही डेकिंग सीट भी हवा के साथ उड़कर नदी के तेज बहाव में समा गई।

लाखों की लागत से बना पुल लोगों को समर्पित होने से पहले ही पीडब्ल्यूडी की लापरवाही की भेंट चढ़ गया, जिससे शिमला और मंडी जिला के पांच से अधिक गांव के लोगों की जल्द पुल सुविधा मिलने की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। यही नहीं, लोक निर्माण के इस कारनामे ने सरकार की साख पर भी बट्टा लगा दिया है।

लोगों का कहना है कि घटिया निर्माण कार्य कर लोक निर्माण विभाग लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहा है। लोगों ने पुल निर्माण के उपयोग में लाई जा रही सामग्री की क्वालिटी पर सवाल उठाते हुए सरकार से इस मामले की जांच करवाएं जाने की मांग की है।

पीडब्ल्यूडी सुन्नी सब डिवीजन के एसडीओ चमन लाल का कहना है कि पुल कर कार्य अभी पूरा नहीं हुआ था, ऐसे में जो नुक्सान हुआ है उसकी भरवाई ठेकेदार ही करेगा । उन्होंने कहा कि ठेकेदार को 10 दिनों में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

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