नशा मुक्त समाज निर्माण का लिया संकल्प, कुल्लू के मौहल में जागरूकता शिविर सफलतापूर्वक संपन्न

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पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण और विशेषज्ञों ने किया जागरूक, 85 लोगों ने नशे को ‘ना’ कहने की ली शपथ, नशे के विरुद्ध जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार- गिरधारी लाल शर्मा.

बंजार/कुल्लू – परस राम भारती

नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत गुरुवार को मोहल स्थित समेकित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) द्वारा “मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध विशेष जागरूकता एवं संवेदनशीलता शिविर” का आयोजन किया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 85 लोगों ने भाग लेकर नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कल्याण अधिकारी कुल्लू गिरधारी लाल शर्मा ने कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से नशा मुक्त भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) कुल्लू के अधिवक्ता डी.आर. भारद्वाज ने प्रतिभागियों को मादक पदार्थों से संबंधित कानूनी प्रावधानों, नागरिक अधिकारों तथा निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी।

वहीं पुलिस थाना भुंतर के एएसआई डोला राम ने नशे के खिलाफ पुलिस विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी देते हुए लोगों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

एटीएफ भुंतर के मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता आकाश ठाकुर ने नशा प्रभावित व्यक्तियों के उपचार, परामर्श, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर उपचार और परिवार के सहयोग से नशे की गिरफ्त में आए लोगों को सामान्य जीवन की मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।

कार्यक्रम में पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट (पीएचडी) की प्रतिनिधि ललिता वाल्डिया ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समय रहते मानसिक समस्याओं की पहचान और उचित मार्गदर्शन से युवाओं को नशे की ओर बढ़ने से रोका जा सकता है।

शिविर में नशे के सामाजिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों, रोकथाम की रणनीतियों, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं तथा परिवार और समुदाय की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को नशा न करने तथा दूसरों को भी जागरूक करने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत मोहल और जराड़-भुट्टी कॉलोनी के जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, युवाओं, नशा प्रभावित परिवारों, स्थानीय दुकानदारों तथा समुदाय के अन्य प्रतिनिधियों सहित कुल 85 लोगों ने भाग लिया।

समापन अवसर पर आईआरसीए मोहल के परियोजना समन्वयक संदीप मिन्हास ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नशे की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि नशे से प्रभावित व्यक्तियों को छिपाने के बजाय उन्हें उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने में सहयोग करें।

इस अवसर पर आईआरसीए मोहल में उपचाराधीन एवं उपचार प्राप्त कर चुके लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों का भी वितरण किया गया। इन उत्पादों के माध्यम से नशा मुक्ति के बाद आत्मनिर्भर जीवन की प्रेरणादायक कहानियों को समाज तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

नशा मुक्त भारत अभियान जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से स्वस्थ, सुरक्षित और नशा मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

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