‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि’ योजना में राहत, गांव में होने वाली वेरिफिकेशन प्रोसेस खत्म
हिमखबर डेस्क
इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 1500 रुपए मासिक सहायता राशि का इंतजार कर रही महिलाओं के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं को पंचायत स्तर पर सत्यापन की लंबी और जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
प्रदेश सरकार ने आवेदन सत्यापन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पंचायतों के माध्यम से होने वाली वेरिफिकेशन प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है। नए आदेशों के अनुसार अब महिलाएं अपना आवेदन सीधे तहसील कल्याण अधिकारी के कार्यालय में जमा करेंगी, जहां दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इसके बाद पात्र आवेदनों को स्वीकृति के लिए आगे भेजा जाएगा और मंजूरी मिलते ही लाभार्थियों के खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि जारी कर दी जाएगी। यह फंैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पंचायत स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया के कारण लाखों आवेदन लंबित पड़े हुए थे।
ग्राम सभाओं में कोरम पूरा न होने से बड़ी संख्या में आवेदन महीनों तक पंचायतों में अटके रहे, जिससे पात्र महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। प्रदेश सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से लंबित आवेदनों के निपटारे में तेजी आएगी और महिलाओं को समय पर सहायता मिल सकेगी।
कोरम की बाध्यता थी सबसे बड़ी रुकावट
योजना शुरू होने के बाद प्रदेशभर से 8.14 लाख से अधिक महिलाओं ने आवेदन किए थे। इनमें से वर्ष 2025 में 6.34 लाख से ज्यादा आवेदन पंचायतों को सत्यापन के लिए भेजे गए, लेकिन ग्राम सभाओं में कोरम पूरा न होने के कारण केवल 50 हजार से कुछ अधिक आवेदनों का ही सत्यापन हो सका। शेष आवेदन पंचायत स्तर पर लंबित रह गए थे। अब सरकार ने पुराने आदेश वापस लेते हुए सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया है।
पात्रता नियमों में बदलाव
सरकार ने सत्यापन प्रक्रिया को आसान बनाया है, लेकिन योजना की पात्रता शर्तें पहले की तुलना में अधिक सीमित हो चुकी हैं। संशोधित नियमों के अनुसार अब केवल 21 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाएं ही योजना का लाभ ले सकेंगी।
परिवार की वार्षिक आय दो लाख से कम होना अनिवार्य है और एक परिवार से एक महिला को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। नए बदलाव का उद्देश्य पात्र महिलाओं तक सहायता राशि को शीघ्र और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना है।

