हवा के साथ नाचते फूल, अंबर को चूमती चोटियां, AC भी फेल, हिमाचल आकर यहां न घूमे, तो ट्रिप बेकार

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हिमखबर डेस्क

पर्यटन नगरी डलहौज़ी के समीप डैनकुंड इन दिनों प्रकृति की अनुपम छटा से सराबोर है। ऊंचाई पर स्थित यह रमणीय पहाड़ी सफेद डेज़ी के फूलों की चादर ओढ़े हुए है, जिससे पूरा क्षेत्र किसी स्वप्नलोक जैसा प्रतीत हो रहा है। दूर-दूर तक फैले सफेद फूलों के बीच बहती ठंडी हवाएं ऐसा एहसास कराती हैं मानो प्रकृति स्वयं यहां अपना वातानुकूलित संसार बसा चुकी हो।

डैनकुंड की ढलानों पर हजारों सफेद डेज़ी फूलों ने ऐसा दृश्य रच दिया है, मानों प्रकृति ने वादियों पर मखमली चादर बिछा दी हो। हरी-भरी घास के बीच चमकती सफेद पंखुडिय़ां और उनके सुनहरे केंद्र पहाडिय़ों की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं।

हवा के झोंकों के साथ झूमते ये फूल ऐसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं, मानो प्रकृति की लय पर स्वयं नृत्य कर रहे हों। यही कारण है कि यहां आने वाला हर पर्यटक इस मनोहारी दृश्य को अपने कैमरे और यादों में कैद करने के लिए उत्सुक दिखाई देता है।

पर्यटकों का लग रहा मेला

डैनकुंड तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कुछ दूर पैदल ट्रैकिंग करनी पड़ती है, लेकिन शिखर पर पहुंचते ही सामने खुलने वाला प्राकृतिक नजारा सारी थकान भुला देता है। सफेद फूलों से सजी घाटियां, देवदार के घने जंगल और दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाएं पर्यटकों को जन्नत जैसा अनुभव कराती हैं।

यहां हवा के साथ डोलते डेज़ी के फूल पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटक भी डैनकुंड की इस प्राकृतिक खूबसूरती से अभिभूत हैं।फूलों की इस बहार ने स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी नई ऊर्जा प्रदान की है।

वीकेंड के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने भी इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण पर बल दिया है। पर्यटकों से अपील की जा रही है कि वे क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखें, कूड़ा-कचरा न फैलाएं और निर्धारित मार्गों पर ही भ्रमण करें ताकि इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की सुंदरता आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रह सके।

निखर रहा पर्यटन कारोबार

पोहलानी माता मंदिर

फूलों की इस बहार ने स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी नई ऊर्जा प्रदान की है। वीकेंड के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने भी इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण पर बल दिया है।

पर्यटकों से अपील की जा रही है कि वे क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखें, कूड़ा-कचरा न फैलाएं और निर्धारित मार्गों पर ही भ्रमण करें ताकि इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की सुंदरता आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रह सके।

डैनकुंड की मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित पोहलानी माता मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। समुद्र तल से लगभग 9,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह प्राचीन मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि माता पोहलानी इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करती हैं और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। डैनकुंड ट्रैक के अंतिम पड़ाव पर स्थित यह मंदिर प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

मंदिर परिसर से दिखाई देने वाली बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं, हरी-भरी घाटियां और दूर तक फैले देवदार के जंगल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक दिखाई देता है।

हवाओं से है डैनकुंड का नाता

स्थानीय लोगों के अनुसार डैनकुंड का नाम भी यहां चलने वाली तेज हवाओं से जुड़ा है, जिनकी सरसराहट कई बार मधुर संगीत जैसी प्रतीत होती है। ऐसे शांत और प्राकृतिक वातावरण में स्थित पोहलानी माता मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। गर्मी और मानसून में बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

सफेद डेज़ी के फूलों से सजी पहाडिय़ों के बीच स्थित यह मंदिर डैनकुंड की सुंदरता को और अधिक दिव्य बना देता है। प्रकृति की गोद में बसा पोहलानी माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि डलहौज़ी क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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