हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के गोहर क्षेत्र में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूटेशन (नामांतरण) के बदले रिश्वत लेने के आरोप में कानूनगो, पटवारी और उनके सहायक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
विजिलेंस की टीम ने पटवारी सहायक को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद मामले में संबंधित कानूनगो और पटवारी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता पूर्ण चंद ने ब्यूरो को शिकायत दी थी कि उसकी जमीन का म्यूटेशन करने के बदले कानूनगो बंसी लाल और पटवारी अरुण धीमान ने दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी है।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने पहले इसकी गोपनीय जांच और सत्यापन किया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने गोहर में योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया।
जांच के दौरान आरोपियों ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये मंगवाए और यह राशि लेने के लिए अपने पटवारी सहायक ललित कुमार को भेजा।
जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय योजना के अनुसार रुपये सौंपे, विजिलेंस टीम ने मौके पर ही ललित कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए कानूनगो बंसी लाल और पटवारी अरुण धीमान को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
बताया जा रहा है कि कानूनगो बंसी लाल जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन रिटायरमेंट से पहले ही रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप में वह विजिलेंस की कार्रवाई की जद में आ गए।
इस संबंध में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) थाना, मंडी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
विजिलेंस की टीम अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिश्वत मांगने और लेने की प्रक्रिया में अन्य कोई व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
डीएसपी विजिलेंस प्रियंक गुप्ता ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। तीनों आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी, ताकि पूछताछ के दौरान रिश्वत मांगने की पूरी साजिश और उससे जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा किया जा सके।

