हिमाचल प्रदेश में रोगी मित्र की आउटसोर्स भर्ती पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। सरकार ने 15000 वेतन पर भरने थे 1000 पद
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स के आधार पर 1000 रोगी मित्रों को तैनात करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने बाल कृष्ण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ता ने सरकार की उस योजना को चुनौती दी थी जिसके तहत स्टाफ नर्स के बराबर शैक्षणिक योग्यता रखने वाले 1000 लोगों को 15,000 रुपये प्रतिमाह के निश्चित वेतन पर आउटसोर्स पर अस्पतालों में तैनात किया जाना था। इसके साथ ही विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में 290 पदों को भरने के लिए एक अगस्त 2026 को जारी की मांग को भी चुनौती दी गई है।
नियमित कर्मियों की तरह काम लेकर शोषण कर रही सरकार
हाई कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में नियमित स्वास्थ्य कर्मचारियों के खाली पदों को भरने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है। सरकार नियमित कर्मचारियों की तरह काम लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण कर रही है। कोर्ट ने इसे लंबित अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने का एक शर्मनाक प्रयास करार दिया।
स्टाफ नर्सों के 1,535 पद खाली
कोर्ट ने पाया कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों में स्टाफ नर्सों के 1,535 पद खाली पड़े हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान इस नीति को लागू नहीं किया जाएगा।
कोई भर्ती या तैनाती नहीं होगी
सरकार के वकील ने यह भी माना कि नीति की समीक्षा की जा रही है और फिलहाल इस भर्ती की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। अदालत ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए आदेश दिया कि अगले आदेश तक ‘रोगी मित्रों’ की कोई नई भर्ती या तैनाती नहीं की जाएगी।

