शाहपुर- नितीश पठानियां
शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी में बादल फटने के बाद तबाही का मंजर अब भी दहला रहा है। 38 परिवारों की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। 23 मकान मलबे में तब्दील हो चुके हैं, जबकि 12 अन्य परिवारों की सांसें पहाड़ी पर अटकी दो विशाल चट्टानों के साये में अटकी हुई हैं।
लगातार खिसक रही मिट्टी के कारण ये चट्टानें कभी भी नीचे आ सकती हैं। यही वजह है कि प्रशासन ने मौसम साफ होने तक इन्हें हटाने का जोखिम नहीं लेने का फैसला किया है।
प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों को खाली करवाकर प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। जिन परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उनके पुनर्वास के लिए वैकल्पिक भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दुर्गम इलाकों में राहत कार्य तेज करने के लिए भारतीय सेना को भी मोर्चा संभालना पड़ा है। सेना के जवान फंसे लोगों और उनके सामान को सुरक्षित निकालने के साथ राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं। घड़ूह गांव तक मार्ग बहाल होते ही वहां विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला से विधायक केवल सिंह पठानिया और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट ली है।
उन्होंने प्रभावित परिवारों से फोन पर बात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया और जल्द स्वयं बोह घाटी का दौरा कर नुकसान का आकलन करने की बात कही।
इसी बीच मौसम विभाग ने 27 जुलाई तक कांगड़ा समेत मध्य पर्वतीय जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।

